BSCB–COMFED की ऐतिहासिक साझेदारी: दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा सीधा बैंकिंग सहारा, गांव-गांव तक पहुंचेगा ‘सुधा’ नेटवर्क
समझौते पर COMFED के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ और BSCB के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार ने हस्ताक्षर किए।
गांव-गांव तक डेयरी और बैंकिंग का एकीकृत मॉडल
कार्यक्रम में मौजूद डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कहा कि यह पहल राज्य में डेयरी विकास का नया अध्याय खोलेगी। उन्होंने बताया कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी और बकरी पालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रहे हैं, और सहकारी बैंक इन क्षेत्रों को वित्तीय सहायता देकर आत्मनिर्भरता की राह आसान कर रहा है।
सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने गुजरात के ‘बनासकांठा मॉडल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में भी बैंकिंग और कृषि—विशेषकर डेयरी व मत्स्य—का एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि शहद उत्पादन को भी ‘सुधा’ नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और ‘सात निश्चय’ के तहत प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र स्थापित होंगे।
8053 सुधा केंद्रों का लक्ष्य, DCS को मिलेगा संस्थागत सहयोग
डेयरी विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि राज्य में 8053 ‘सुधा’ बिक्री केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक गांव में डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटी (DCS) और प्रत्येक पंचायत में बिक्री केंद्र स्थापित कर उत्पादकों को संगठित बाजार और बेहतर मूल्य दिलाने की योजना है।
इस समझौते के तहत DCS को तकनीकी, संस्थागत और वित्तीय सहयोग मिलेगा। “बैंक मित्र” मॉडल के जरिए समितियों और दुग्ध उत्पादकों को डिजिटल भुगतान, माइक्रो एटीएम और ऋण सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इससे खासकर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आय में वृद्धि होगी।
पारदर्शिता और मॉनिटरिंग पर जोर
सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि सहकारी बैंक की निगरानी Reserve Bank of India (RBI) और National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD) द्वारा की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। फाइनेंशियल लिटरेसी कार्यक्रम के तहत समितियों को प्रशिक्षित कर बैंकिंग सेवाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जाएगा।
‘सहकारिता में सहकार’ की मजबूत पहल
यह समझौता सहकारी संस्थाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और उनकी सामूहिक शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से न केवल दुग्ध उत्पादकों को स्थायी आय मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
बिहार में सहकारिता आधारित यह वित्तीय-डेयरी गठजोड़ आने वाले समय में रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का बड़ा आधार बन सकता है।







