9 जनवरी तक फॉर्म नहीं भरा तो सरकारी कर्मी बनने का सपना नहीं होगा पूरा, ये मौका आपके सपनों को कर सकता है पूरा...
Bihar Desk: बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए सरकारी कर्मी बनने की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. राज्य सरकार द्वारा आयोजित सक्षमता परीक्षा के पांचवें और अंतिम चरण को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है.
9 जनवरी आवेदन की अंतिम तिथि : राज्य के करीब 53 हजार नियोजित शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक इस परीक्षा के लिए या तो आवेदन नहीं किया है और किया है तो क्वालिफाई नहीं किया है. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि 9 जनवरी 2026 आवेदन की अंतिम तिथि है और इसके बाद किसी भी हाल में मौका नहीं दिया जाएगा.
राज्य कर्मी बनने का आखिरी मौका : ऐसे में अगर नियोजित शिक्षक 9 जनवरी तक आवेदन नहीं करते हैं, तो वे न केवल राज्य कर्मी बनने से वंचित रह जाएंगे, बल्कि सरकारी कर्मियों को मिलने वाली विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी नहीं ले पाएंगे. राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट संदेश पूर्व में ही दिया जा चुका है कि सक्षमता परीक्षा पास करना नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी बनने के लिए अनिवार्य शर्त है.
तमाम शिक्षक संगठन पहले यह दावा कर रहे थे कि नियोजित शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा नहीं देनी होगी, लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है. ऐसे में नियोजित शिक्षकों के पास सरकारी कर्मी बनने का यह अंतिम अवसर माना जा रहा है.
क्या है सक्षमता परीक्षा और क्यों है जरूरी? : सक्षमता परीक्षा राज्य सरकार द्वारा नियोजित शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता जांचने के लिए आयोजित की जा रही है. विभिन्न निकायों से बाहर नियोजित शिक्षकों के गुणवत्ता पर कई बार प्रश्न खड़े हुए थे. दूसरी ओर नियोजित शिक्षक राज्य कर्मी बनाने की मांग कर रहे थे. इन सबके बीच सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि सक्षमता परीक्षा जैसा मामूली परीक्षा देकर नियोजित शिक्षक का राज्य कर्मी बन सकेंगे.
सरकार ने स्पष्ट किया कि समान कार्य के लिए समान सेवा शर्तें सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से यह परीक्षा जरूरी है. जो शिक्षक इस परीक्षा में सफल होंगे, उन्हें राज्य कर्मी का दर्जा मिलेगा और वे नियमित शिक्षकों की तरह वेतन, पेंशन, इंश्योरेंस और अन्य सरकारी लाभ पाने के हकदार बनेंगे.
40 प्रतिशत अंक लाना है अनिवार्य : सक्षमता परीक्षा में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों को न्यूनतम 40%, पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों को 36.5%, अति पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों को न्यूनतम 34% और अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग और महिला शिक्षकों को न्यूनतम 32% अंक लाना अनिवार्य है. शिक्षा विभाग के मुताबिक, परीक्षा का स्तर बहुत कठिन नहीं रखा गया है, ताकि योग्य शिक्षक आसानी से पास हो सकें. इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, और ऐसे शिक्षकों के लिए यह आखरी मौका है.
शिक्षकों की आपत्ति हो गई है दूर : सक्षमता परीक्षा का सिलेबस शिक्षकों के स्तर और विषय के अनुसार तय किया गया है. स्नातक ग्रेड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के अध्यक्ष पिंटू कुमार ने कहा कि जो बचे हुए नियोजित शिक्षक हैं उनसे वह अनुरोध करेंगे कि इस परीक्षा में जरूर शामिल हो.
''सिलेबस जो शिक्षक बहाली के परीक्षा का है वही है लेकिन सक्षमता परीक्षा और शिक्षक बहाली परीक्षा कंडक्ट कराने वाली परीक्षा एजेंसी अलग-अलग है. ऐसे में प्रश्न पत्र का स्टैंडर्ड एक अलग विषय है. हालांकि पहले जो शिक्षक इस परीक्षा का विरोध कर रहे थे और जिन बिंदु पर आपत्ती जाता रहे थे वह सब सरकार ने दूर कर दिया है. जिस विद्यालय में पोस्टेड हैं उसी में उन्हें राज्य कर्मी बनाया जा रहा है और सेवा निरंतरता का भी लाभ दिया जा रहा है.''- पिंटू कुमार, अध्यक्ष, स्नातक ग्रेड प्रशिक्षित शिक्षक संघ
सक्षमता परीक्षा का सिलेबस है:-
- सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी
- सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स
- शिक्षण अभिरुचि और शैक्षणिक मनोविज्ञान
- विषय से संबंधित ज्ञान (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के अनुसार)
- शिक्षा से जुड़े बिहार सरकार के नियम और नीतियां
BSEB कंडक्ट करती है परीक्षा : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति जो सक्षमता परीक्षा कंडक्ट कराने वाली एजेंसी है, उसके अध्यक्ष आनंद किशोर का कहना है कि सिलेबस वही रखा गया है, जो शिक्षक पहले से पढ़ाते आ रहे हैं. इसलिए जो पठन-पाठन से शिक्षक जुड़े हुए हैं उन्हें इस परीक्षा में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.
''लगभग 83.14% शिक्षक सफल भी हो गए हैं. ऑनलाइन मोड में कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा आयोजित की जाती है और पांचवें और आखिरी चरण की सक्षमता परीक्षा कुछ जनवरी के अंत या फरवरी के प्रथम सप्ताह तक संपन्न करा कर फरवरी अंत तक रिजल्ट जारी कर देने का लक्ष्य रखा गया है.''- आनंद किशोर, अध्यक्ष, BSEB

शिक्षक संगठनों की बदली हुई प्रतिक्रिया : सक्षमता परीक्षा को लेकर कई शिक्षक संगठनों ने शुरू में परीक्षा का विरोध किया था लेकिन अब सभी शांत पर गए हैं. स्नातक ग्रेड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के अध्यक्ष पिंटू कुमार ने कहा कि शिक्षक राजनीति करने वाले संगठनों से दूर रहें. किसी भी भ्रम में ना रहे और जो बच गए हैं वह अंतिम तिथि से पहले आवेदन जरूर करें.
''नई शिक्षा नीति के तहत राज्य कर्मी शिक्षक ही विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा सकते हैं और आउटसोर्सिंग और गेस्ट टीचर की व्यवस्था खत्म कर दी गई है. परीक्षा का विरोध करने वाले शिक्षक संगठनों को सुप्रीम कोर्ट से भी पूर्व में ही निर्देश मिल गया है कि क्वालिटी एजुकेशन से कोई समझौता नहीं होगा. सक्षमता परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है.''- पिंटू कुमार, अध्यक्ष, स्नातक ग्रेड प्रशिक्षित शिक्षक संघ
नियोजित शिक्षक वेतन वृद्धि से हो सकते हैं वंचित : पिंटू कुमार ने कहा कि जो राज्य कर्मी शिक्षक हैं उनकी वेतन मद में 60% राशि केंद्र सरकार से मिलती है और 40% राशि राज्य सरकार से मिलती है. लेकिन नियोजित शिक्षकों को वेतन राज्य सरकार अपने मद की राशि से देती है. सरकार पर यह एक बोझ है.
''बड़ी संख्या में जब नियोजित शिक्षक राज्य कर्मी बन जाएंगे और कुछ ही शिक्षक बचेंगे तो संभव है कि भविष्य में यह नियोजित शिक्षक उपेक्षा का शिकार हो जाएंगे. राज्य सरकार नियोजित शिक्षकों के वेतन वृद्धि को रोक सकती है. इसके अलावा पांच पांच अवसर मिलने के बाद भी जो राज्य कर्मी नहीं बन पाएंगे, ऐसे शिक्षकों को विद्यालय में भी और समाज में भी उपेक्षा की नजरों से देखा जाएगा.''- पिंटू कुमार, अध्यक्ष, स्नातक ग्रेड प्रशिक्षित शिक्षक संघ
266786 शिक्षक बन गए हैं राज्य कर्मी : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित सक्षमता परीक्षा के चार चरण में अब तक 266786 नियोजित शिक्षक सफल होकर राज्य कर्मी बन गए हैं. अब विशिष्ट शिक्षक के तौर पर इनकी पहचान है. ऐसे में लगभग 53 हजार नियोजित शिक्षक हैं जो राज्य कर्मी नहीं बन पाए हैं.
इन्हें सक्षमता परीक्षा में शामिल होने के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना है और फॉर्म भरने की प्रक्रिया जारी है जो 9 जनवरी तक चलेगी. सरकार ने नियोजित शिक्षकों को पूर्व में राज्य कर्मी बनने के लिए सक्षमता के तीन अवसर ही दिए थे लेकिन बाद में शिक्षकों को दो अवसर बढ़ाते हुए पांच अवसर दिए गए.







