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बिहार में अब नहीं चलेगा गिट्टी-बालू का अवैध खेल, जियो-फेंसिंग और पारदर्शी ई-चालान सिस्टम से लगेगी लगाम

Patna: खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जियो-फेंसिंग के जरिए प्रत्येक स्टोरेज सेंटर की डिजिटल सीमा तय होगी. यदि निर्धारित क्षेत्र के बाहर अवैध तरीके से गिट्टी या बालू का भंडारण अथवा परिवहन किया जाता है, तो उसकी जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज होगी. इससे अवैध खनन और बिना अनुमति सामग्री के परिवहन पर निगरानी आसान होगी.
 
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Patna: बिहार सरकार ने गिट्टी और बालू के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. अब राज्य के सभी अधिकृत स्टोरेज सेंटरों की जियो-फेंसिंग की जाएगी, ताकि उनकी गतिविधियों की डिजिटल निगरानी की जा सके. इसके साथ ही ई-चालान प्रणाली को और पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाया जाएगा, जिससे खनिजों के परिवहन में फर्जीवाड़े और राजस्व नुकसान पर अंकुश लगाया जा सके.

एआई जनरेटेड फोटो

खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जियो-फेंसिंग के जरिए प्रत्येक स्टोरेज सेंटर की डिजिटल सीमा तय होगी. यदि निर्धारित क्षेत्र के बाहर अवैध तरीके से गिट्टी या बालू का भंडारण अथवा परिवहन किया जाता है, तो उसकी जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज होगी. इससे अवैध खनन और बिना अनुमति सामग्री के परिवहन पर निगरानी आसान होगी.

विभाग का कहना है कि इससे हर भंडारण स्थल की सटीक भौगोलिक पहचान दर्ज होगी और ई-चालान व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा.

क्या है नया नियम 

नई व्यवस्था के अनुसार, लघु व्यवसायियों के लिए भंडारण स्थल की जियो-फेंसिंग कराना अनिवार्य होगा. वहीं मध्यम और वृहद व्यवसायियों को अपने भंडारण स्थल के साथ-साथ वहां स्थापित धर्मकांटा की भी जियो-फेंसिंग करानी होगी.

इसके लिए संबंधित जिले के सहायक निदेशक, खनिज विकास पदाधिकारी अथवा खनन निरीक्षक स्थल का निरीक्षण करेंगे। वे भंडारण स्थल और धर्मकांटा के चारों कोनों का जीपीएस निर्देशांक तथा फोटोग्राफ लेकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करेंगे. इसके बाद राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) की ओर से संबंधित स्थल की जियो-फेंसिंग सक्रिय की जाएगी.

राजस्व चोरी पर लगेगी लगाम 

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी तकनीकी या भौगोलिक कारण से यदि भंडारण स्थल से सीधे ई-चालान जारी करना संभव नहीं होगा, तो जिला खनन कार्यालय की अनुशंसा के आधार पर विशेष परिस्थितियों में विभाग अलग से क्षेत्र (रेंज) निर्धारित कर सकेगा. इससे वास्तविक कारोबार प्रभावित नहीं होगा, लेकिन निगरानी बनी रहेगी.

विभाग का कहना है कि जियो-फेंसिंग लागू होने के बाद ई-चालान केवल स्वीकृत स्थान से ही जारी किया जा सकेगा. इससे खनिजों की आवाजाही की ऑनलाइन निगरानी आसान होगी और फर्जी भंडारण, अवैध परिवहन तथा राजस्व की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा. नई व्यवस्था बिहार खनिज नियमावली, 2019 में वर्ष 2026 में किए गए संशोधनों के तहत लागू की गई है/