Driving Licence बनवाना हुआ आसान, Learning Licence फेल या एक्सपायर होने पर अब रिन्यूअल से ही मिलेगा दूसरा मौका
Bihar: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ी राहत दी है. अब यदि कोई आवेदक लर्निंग लाइसेंस की परीक्षा में असफल हो जाता है या उसका लर्निंग लाइसेंस निर्धारित अवधि में समाप्त हो जाता है, तो उसे नया आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी. ऐसे आवेदक अब अपने पुराने लर्निंग लाइसेंस का रिन्यूअल (नवीनीकरण) कराकर दोबारा परीक्षा दे सकेंगे.

परिवहन विभाग के अनुसार, पहले लर्निंग लाइसेंस की वैधता समाप्त होने या परीक्षा में असफल होने की स्थिति में आवेदकों को पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती थी. इसके लिए नया आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और शुल्क भुगतान जैसी औपचारिकताएं फिर से पूरी करनी होती थीं. नई व्यवस्था से समय और धन दोनों की बचत होगी.
एलएल बनने के एक माह के बाद और एलएल की वैद्यता समाप्त होने से 20 दिन पहले फाइनल डीएल का आवेदन कर सकते है. अगर उन छह माह के भीतर आप फाइनल लाइसेंस का आवेदन नहीं करते है तो वह फेल हो जाता है. इसके बाद आवेदक फिर से नया लर्निंग लाइसेंस अप्लाई करते है, जिसमें आपको फिर से सारे पेपर अपलोड करना होगा. लेकिन फेल एलएल का रिनुवल भी होता है. जिसमें आपको पुराने फेल लर्निंग की कॉपी के आधार पर शुल्क कटाकर उसका रिनुवल करायेंगे. तो लर्निंग लाइसेंस की वैद्यता फिर से छह माह हो जायेगी.

जानकारी के अभाव में वाहन मालिक लर्निंग लाइसेंस फेल होने पर फिर से नया आवेदन साइबर कैफे से करते है जिसमें उन्हें परेशानी होती है और बिचौलिये इसमें अधिक पैसा वसूल लेते है. ऐसे में आवेदक अपने फेल लर्निंग लाइसेंस को संभालकर रखते है तो उन्हें आगे यह परेशानी नहीं होगी. इधर मामले में डीटीओ कुमार विवेक ने बताया कि फेल लर्निंग लाइसेंस रिनुवल का ऑप्शन विभाग के वेबसाइट पर ऑनलाइन में उपलब्ध है. आवेदक को खुद से आवेदन करना है, शुल्का जमा करके वह कार्यालय में आकर टेस्ट देकर अपना एलएल रिनुवल करा सकते है.
लर्निंग लाइसेंस का कैसे होता आवेदन
एलएल अप्लाई के लिए आवेदक को विभाग के वेबसाइट परिवहन डॉट जीवोवी डॉट इन पर जाकर आवेदन करना है. जिसमें अपना नाम, पता, जन्मतिथि, ब्लडग्रुप, बॉडी पर निशान आदि कॉलम में अंकित करना होता है. इसके बाद उसमें अपने आधार कार्ड की कॉपी, मैट्रिक के मार्कशीट की कॉपी, ब्ल्डग्रुप की कॉपी, फोटो, हस्ताक्षर को अपलोड करना है. इसके बाद चालान शुल्क कटाकर, टेस्टिंग का स्लॉट बुक करना होगा. जिसके बाद तय तिथि पर डीटीओ ऑफिस जाकर कंप्यूटर पर टेस्ट देंगे.

टेस्ट अपने कंप्यूटर व ऑफिस जाकर दोनों विकल्प
ऑनलाइन आवेदन में डीटीओ ऑफिस जाकर टेस्ट देने और कंप्यूटर पर खुद से टेस्ट देने दोनों ऑप्शन उपलब्ध है. वाहन मालिक की इच्छा पर है कि वह ऑफिस जाकर टेस्ट देंगे या अपने कंप्यूटर पर खुद से एलएल का टेस्ट देंगे. खुद के कंप्यूुटर पर टेस्ट देना है तो आधार में दर्ज पता स्वत स्कैन होकर कॉलम में अंकित हो जायेगा. लेकिन डीटीओ ऑफिस जाकर टेस्ट देना चाहते है तो सारे पता के कॉलम में सारी जानकारी खुद से अंकित करनी होती है.
आवेदन करते समय बरतें सावधानी
जब आवेदन लर्निंग लाइसेंस का आवेदन देते है तो उस वक्ता ध्यान नहीं देते है कि उनके नाम में मामूली गलती हो गयी है. जैसे विकास नाम में बहुत लोग ”” एस में ”” लिखते है तो कुछ ”” एसएच ”” लिखते है, बाबूल नाम में लास्ट में यूएल की जगह ”” एलयू ”” कर दिया जिसमें बाबूल से वह बबलू हो गया. नाम के टाइटल शर्मा की सिंह लिख दिया, या टाइटल जोड़ना है. इसे अगर लर्निंग लाइसेंस के आवेदन के समय ठीक से देख ले तो यह गड़बड़ी नहीं होगी, लेकिन लोग ध्यान नहीं देते, साइबर कैफे संचालक को अप्लाई का आवेदन करके निश्चिंत हो जाते है.
इस गलती को लेकर उन्हें क्लेम लेने, दूसरे दस्तावेज में काम कराने में परेशानी होती है. तब उन्हें यह ध्यान आता है कि यह गलती हो गयी. इसके बाद वह सुधार कराने जिला परिवहन कार्यालय जाते, जो प्रक्रिया पहले सामान्य थी. लेकिन अब मॉर्थ द्वारा विभाग के सर्वर का सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है. जिसमें काफी दस्तावेज देने होते है.
जन्मतिथि में कोई सुधार नहीं होगा
नाम, टाइटल, पता में थोड़ा बहुत सुधार तो आवेदन, संबंधित दस्तावेज व चालान के बाद हो सकता है. लेकिन जन्मतिथि में गलती हो गयी तो कोई सुधार नहीं होगा. इसमें बस एक विकल्प है कि गलत जन्मतिथि वाले एलएल या डीएल को कैंसिल कराकर नया ही बनवाना होगा. इससे बचने का एक मात्र उपाय यही है कि आवेदन करते समय पूरी जानकारी सही से भरे जांच ले, फिर समिट बटन पर क्लिक करें.







