अस्पतालों में इलाज की राह आसान बना रहीं जीविका दीदियां, 45 स्वास्थ्य सहायता केंद्रों से मरीजों को मिल रही मदद
Bihar news: सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को अब पंजीकरण, डॉक्टर के कक्ष, जांच केंद्र या दवा काउंटर खोजने के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए जीविका दीदियां अस्पतालों में मददगार की भूमिका निभा रही हैं। राज्य के 45 सरकारी अस्पतालों में संचालित स्वास्थ्य सहायता केंद्रों के जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य मित्र मरीजों और उनके परिजनों को इलाज की प्रक्रिया समझाने से लेकर जरूरी सुविधाओं तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।
भागलपुर से शुरू हुई पहल अब 45 केंद्रों तक पहुंची
इस व्यवस्था की शुरुआत 5 सितंबर 2022 को भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (JLNMCH) से हुई थी। शुरुआती अनुभवों के बाद पहल का विस्तार दूसरे अस्पतालों तक किया गया।
वर्तमान में राज्य में कुल 45 जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र काम कर रहे हैं। इनमें 35 केंद्र बड़े सरकारी एवं जिला अस्पतालों में, जबकि 10 केंद्र प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर स्वास्थ्य मित्र अलग-अलग शिफ्ट में मरीजों की सहायता करते हैं।
डॉक्टर से लेकर जांच और दवा तक में मदद
अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज को किस काउंटर पर जाना है, किस डॉक्टर से संपर्क करना है और जांच या दवा कहां से मिलेगी—इन तमाम जानकारियों में स्वास्थ्य मित्र सहयोग करती हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को ब्लड, ऑक्सीजन और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी समन्वय किया जाता है।
खासकर गांव और दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो रही है। अस्पताल की व्यवस्था से अनजान लोगों को सही जगह तक पहुंचाने के साथ स्वास्थ्य मित्र डॉक्टरों, नर्सों, एएनएम, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और पंजीकरण कर्मियों के साथ भी समन्वय करती हैं।
भर्ती मरीजों की भी रखी जाती है निगरानी
जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्रों की भूमिका केवल अस्पताल पहुंचने तक सीमित नहीं है। भर्ती मरीजों की स्थिति पर भी स्वास्थ्य मित्र नजर रखती हैं। मरीज की जरूरत के मुताबिक अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों से संपर्क कर आगे के इलाज और फॉलोअप में सहायता की जाती है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़े किसी सदस्य या उनके परिजन के अस्पताल में भर्ती होने पर स्वास्थ्य मित्र निर्धारित फॉर्म में मरीज की जानकारी दर्ज कर उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं।
संकुल स्तरीय संघ करता है स्वास्थ्य मित्रों का चयन
स्वास्थ्य सहायता केंद्रों के संचालन के लिए स्थानीय जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ के माध्यम से स्वास्थ्य मित्रों का चयन किया जाता है। चयन के बाद उन्हें जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद अस्पतालों में अलग-अलग शिफ्ट में उनकी तैनाती की जाती है।
इस पहल से जहां मरीजों को अस्पताल की जटिल प्रक्रिया समझने और सुविधाओं तक पहुंचने में सहूलियत मिल रही है, वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जनसेवा से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
गरीब और ग्रामीण परिवारों को मिल रही राहत
अस्पतालों में हेल्प डेस्क की व्यवस्था खास तौर पर उन परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है, जो पहली बार बड़े सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते हैं। पंजीकरण से लेकर जांच, दवा और फॉलोअप तक सही जानकारी मिलने से उनकी भागदौड़ कम हो रही है।
ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि अस्पतालों में हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्था का सीधा लाभ गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मिल रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि इलाज के लिए आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समय पर और सहज सहायता मिले तथा उसे किसी तरह की परेशानी या बिचौलियों का सामना न करना पड़े।
जीविका की यह पहल स्वास्थ्य सुविधाओं को मरीजों के लिए आसान बनाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी का भी उदाहरण बनकर सामने आ रही है।







