न्याय सिर्फ हो नहीं, दिखे भी- मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का बड़ा संदेश, जांच प्रणाली को डिजिटल ताकत
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवकों से जुड़े मामलों में जांच और प्रस्तुतीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी बेहद अहम होती है, और हर कार्रवाई नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। यह बयान प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सरकार के स्पष्ट रुख को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान दीपक कुमार सिंह (महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त) और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि फरवरी-मार्च से शुरू हुए प्रशिक्षण अभियान के तहत अब तक 3500 से अधिक प्रशासनिक पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इससे सरकारी सेवकों के खिलाफ मामलों में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा।
वेबसाइट लॉन्च के इस मौके पर अधिकारियों को बताया गया कि अब अनुशासनिक कार्रवाई से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण पुस्तकें और दिशा-निर्देश ऑनलाइन उपलब्ध होंगे, जिससे जांच प्रक्रिया और भी सुगम और पारदर्शी बनेगी।
इस अवसर पर बी. राजेन्दर (अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग) ने अभिलेख प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी और इसे भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया।
कार्यक्रम में मिहिर कुमार सिंह, अरविंद कुमार चौधरी, संतोष कुमार मल्ल, प्रणव कुमार और रचना पाटिल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
स्पष्ट है कि यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल और व्यवस्थित बनाएगी, बल्कि आने वाले समय में सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती भी देगी।







