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IRCTC केस में लालू-राबड़ी-तेजस्वी कोर्ट में पेश, आरोप तय करने की कार्रवाई टली; अब 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई

 
IRCTC केस में लालू-राबड़ी-तेजस्वी कोर्ट में पेश, आरोप तय करने की कार्रवाई टली; अब 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई

Bihar news: रेलवे होटल टेंडर से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। पूर्व रेल मंत्री और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत मामले के अन्य आरोपी अदालत में पेश हुए। हालांकि, आरोप तय करने की औपचारिक प्रक्रिया शनिवार को पूरी नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी।

यह मामला उस अवधि से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों ने रेलवे के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में कथित अनियमितता और उससे जुड़े पटना की जमीन के लेन-देन को मामले का आधार बनाया है।

16 में से 9 आरोपियों पर चलेगा PMLA केस

मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। 10 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इनमें से 9 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था, जबकि सात आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया।

आरोप तय किए जाने वाले प्रमुख आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स, लारा प्रोजेक्ट्स तथा कारोबारी विनय कोचर और विजय कोचर शामिल हैं।

10 सितंबर के आदेश के बाद अदालत ने आरोपों की औपचारिक प्रक्रिया के लिए 3 अक्टूबर की तारीख तय की थी। इसी क्रम में शनिवार को सभी संबंधित आरोपियों की अदालत में पेशी हुई।

क्या है रेलवे होटल टेंडर से जुड़ा पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी के रेलवे होटलों के संचालन और रखरखाव से जुड़े टेंडर में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई।

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर सुझाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दोनों होटलों के संचालन का अधिकार दिया गया। जांच में होटल कारोबारियों विनय कोचर और विजय कोचर की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।

एजेंसियों का दावा है कि टेंडर से जुड़े कथित लाभ के बदले पटना की एक जमीन के हस्तांतरण का रास्ता तैयार हुआ।

जमीन और कंपनी शेयर का लेन-देन भी जांच के घेरे में

मामले की जांच में पटना की जमीन से जुड़े लेन-देन को अहम कड़ी माना गया है। अदालत के 10 सितंबर के आदेश में जांच एजेंसियों द्वारा पेश किए गए उस आरोप का उल्लेख है, जिसके मुताबिक जमीन पहले एक कंपनी के माध्यम से सरला गुप्ता के नाम से जुड़ी और बाद में कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर हस्तांतरित किए गए।

ED ने इन लेन-देन को रेलवे होटल टेंडर से मिले कथित लाभ यानी ‘क्विड प्रो क्वो’ से जोड़कर जांच की है।

हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप और अदालत के समक्ष रखी गई सामग्री का हिस्सा हैं। लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

2018 में ED ने दाखिल की थी पहली चार्जशीट

इस मामले में ED ने वर्ष 2018 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें RJD नेता प्रेम चंद गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।

बाद की जांच में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य नाम भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े। सितंबर 2026 के अदालत के आदेश में नौ आरोपियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया।

अब 30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

शनिवार की कार्यवाही में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपी अदालत में मौजूद रहे, लेकिन आरोपों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।

इस सुनवाई के बाद एक बार फिर IRCTC होटल टेंडर से जुड़े पुराने मामले में लालू परिवार की अदालत में मौजूदगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।