लालू-तेजस्वी के ब्राह्मण चेहरे मृत्युंजय तिवारी का राजद से नाता खत्म, भाजपा का दामन थाम सकते हैं
Bihar news: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के पार्टी से इस्तीफे से बिहार में सियासत गर्मा गई है. मृत्युंजय राजद के प्रमुख ब्राह्मण चेहरा हैं. उन्होंने पार्टी में सम्मान नहीं मिलने की बात कहकर प्रदेश नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जताई. गुरुवार शाम को वे पार्टी प्रदेश प्रवक्ता पद से अपना इस्तीफा लेटर प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के पास पहुंच गए. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष ने राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के विदेश से लौटने तक इंतजार करने को कहा है. मृत्युंजय ने इस्तीफे के पीछे की पूरी वजह सार्वजनिक नहीं की है. मगर वे किस बात से नाराज हैं, इस पर अंदरखाने से एक बड़ा कारण सामने आया है. राजद सूत्रों के अनुसार मृत्युंजय तिवारी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव से नाराज चल रहे हैं. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से शिकायत भी की है.
दरअसल, मृत्यंजय तिवारी लंबे समय से मीडिया प्रभारी होने के नाते राष्ट्रीय चैनलों पर राजद का पक्ष रखते आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में उन्हें ऐसा करने से रोका गया है. इसी को लेकर वह नाराज चल रहे हैं. गुरुवार शाम पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल से उन्होंने कहा कि जब पार्टी में सम्मान नहीं है तो फिर पद पर रहकर क्या करेंगे. उस वक्त कोषाध्यक्ष डाॅ सुनील कुमार सिंह, तनवरी हसन और अन्य वरीय नेता भी मौजूद रहे. सभी ने मृत्युंजय तिवारी को इस्तीफा देने से मना कर दिया.
हालांकि, इस संबंध में पूछे जाने पर मंगनी लाल ने इस्तीफा मिलने की बात से इनकार किया है. मृत्युंजय तिवारी ने कहा- तेजस्वी से शिकायत की लेकिन उन्होने संज्ञान नहीं लिया. बात आयी और गयी तक सिमटकर रह गई. इससे उनका मन और पार्टी से टूट गया. दूसरी ओर, मृत्युंजय तिवारी ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के सभी पदों से 16 जुलाई, 2026 को इस्तीफा दे दिया है. वे राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बेहद करीबी थे. वर्ष 2014 में लालू यादव ने उन्हें मीडिया प्रभारी और पार्टी का प्रवक्ता बनाया था. उस समय से वो अपने दायित्वों को निभा रहे थे. वह अब पार्टी में नहीं रहना चाहते हैं क्योंकि उन्हें अपमानित महसूस हो रहा है. मृत्युंजय ने यह भी दावा किया कि तेजस्वी यादव को कुछ लोगों ने घेर रखा है. उन्हें हाईजैक कर लिया गया है. इसमें पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं.
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पार्टी में सम्मान न मिलने की बात कहने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह भी आरोप लगाया कि पार्टी को कुछ लोग दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं. इसलिए इस पार्टी में मान-सम्मान से समझौता करके अब आगे नहीं रहा जा सकता. हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया है. मृत्युंजय ने कहा कि बीते 6-7 महीनों से पार्टी में ऐसा चल रहा है, इस बारे में वह तेजस्वी के सामने कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया. इसलिए अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. ऐसे में मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ता का इस पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं था. अपमानित होकर कोई राजनीति नहीं कर सकता है. मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है, लेकिन उनकी बातों से लग रहा है कि उन्होंने राजद छोड़ने का पूरा मन बना लिया है. उनके राजद से जाने पर लालू एवं तेजस्वी की पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है.
राजद मुख्य रूप से यादव और मुस्लिम वोटबैंक को केंद्र में रखकर राजनीति करती आई है. इसके इतर मृत्युंजय तिवारी पार्टी का लंबे समय से प्रमुख ब्राह्मण चेहरा रहे हैं. एक दशक से भी ज्यादा समय तक वह मीडिया और सार्वजनिक रूप से पार्टी की बात को मुखर रूप से रखते आए हैं. राजद के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है. अपने बयान के अंत में मृत्युंजय तिवारी ने कहा, "हमने बुरे दिनों में राजद का साथ दिया था. अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहण किया और राजद की नीतियों को आगे बढ़ाया, लेकिन पार्टी में कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने दीमक की तरह चाटकर बर्बाद कर दिया. ऐसे लोगों से अगर तेजस्वी यादव घिरे हैं तो फिर हम जैसे कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में रहना उचित नहीं है." बता दें कि मृत्युंजय तिवारी बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं. राष्ट्रीय जनता दल में ब्राह्मण के तौर पर बड़ा चेहरा माने जाते थे. अब मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे से पार्टी को बड़ा झटका लगा है.
दरअसल, मृत्युंजय तिवारी का दर्द बड़ा गहरा है. साल 2010 में भी प्रवक्ता थे और 2026 में भी प्रवक्ता बनकर रह गए. मृत्युंजय तिवारी के साथ कभी टीवी डिबेट में भाजपा की ओर से बतौर प्रवक्ता विजय सिन्हा बैठते थे. तब प्रोग्राम से पहले विजय सिन्हा हाथ दबाकर मृत्युंजय तिवारी से कहते थे कम हमला बोलिएगा. प्रोग्राम सुशील कुमार मोदी तक देखते थे. भाजपा में विजय सिन्हा प्रवक्ता से डिप्टी सीएम तक बन गए और राजद में मृत्युंजय तिवारी प्रवक्ता बनकर ही रह गए हैं. राजद के पास कई ऐसे मौके आए, चाहती तो मृत्युंजय तिवारी का प्रमोशन कर सकती थी. पर कभी नहीं किया. साल 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा ने मृत्युंजय तिवारी को ऑफर दिया था. आप भाजपा में शामिल हो जाईए. तब मृत्युंजय तिवारी राजद में ही रह गए. लेकिन बाद में उन्हें अपने इस फैसले का पछतावा भी हुआ. अब फिर लगता है कि बांकीपुर उपचुनाव के दौरान भाजपा ने फिर ऑफर दिया होगा. जिसे मृत्युंजय तिवारी ने एक्सेप्ट कर लिया हो.







