बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम सख्त, अब GIS से होगा जमीन का भौतिक सत्यापन
Bihar news: बिहार में जमीन के न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) में संभावित बढ़ोतरी की चर्चा के बीच राज्य सरकार ने निबंधन प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसका भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक से किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़ी गलत जानकारी पर रोक लगाना और राजस्व वसूली बढ़ाना है।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला अवर निबंधक और निबंधन पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।
गलत जानकारी से हो रहा था राजस्व का नुकसान
सरकार का कहना है कि कई मामलों में जमीन की वास्तविक श्रेणी, सही रकबा और उस पर बनी इमारतों की पूरी जानकारी निबंधन के समय नहीं दी जाती थी। इससे जमीन का मूल्य कम दिखाया जाता था और सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता था। अब इस गड़बड़ी को रोकने के लिए दस्तावेजों के साथ-साथ स्थल निरीक्षण और GIS आधारित जांच को जरूरी कर दिया गया है।
राजस्व लक्ष्य से पीछे चल रही सरकार
चालू वित्तीय वर्ष में बिहार सरकार ने 9,130 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक सिर्फ 5,662.51 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। बांका निबंधन कार्यालय की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां मौजूदा सत्र के शुरुआती तीन महीनों में महज 829 जमीन की रजिस्ट्री हुई है, जबकि वर्ष 2025 में 12 हजार से ज्यादा निबंधन दर्ज किए गए थे।
नगर क्षेत्र की जमीन की जांच खुद करेंगे अधिकारी
सरकार ने निर्देश दिया है कि नगर निकाय क्षेत्र में स्थित जमीन और उस पर बने निर्माण का स्थल निरीक्षण निबंधन पदाधिकारी स्वयं करेंगे। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह जिम्मेदारी कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक या अधिकृत कर्मचारी निभा सकते हैं। हालांकि, कर्मचारियों द्वारा किए गए निरीक्षण में से कम से कम 10 प्रतिशत मामलों की जांच निबंधन पदाधिकारी खुद करेंगे।
हर निरीक्षण की होगी डिजिटल एंट्री
अब जमीन के हर स्थल निरीक्षण की जानकारी कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य होगा। यदि रिकॉर्ड में किसी तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई तय मानी जाएगी। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी।
AIG करेंगे नियमित निरीक्षण
सभी सहायक निबंधन महानिरीक्षकों (AIG) को निर्देश दिया गया है कि वे सप्ताह में कम से कम तीन दिन अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण करें। जो कार्यालय राजस्व संग्रह में पीछे हैं, उनकी अलग से समीक्षा रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेजी जाएगी।
निबंधन से जुड़े प्रमाणपत्र होंगे ऑनलाइन
सरकार ने निबंधन प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नॉन-इंकंबरेंस सर्टिफिकेट और सच्ची प्रतिलिपि अब ऑनलाइन जारी करने का फैसला लिया है। पुराने दस्तावेज, जो अभी डिजिटाइज नहीं हुए हैं, उनकी प्रतिलिपि भले ऑफलाइन दी जाए, लेकिन उसमें ऑनलाइन आवेदन संख्या दर्ज करना अनिवार्य होगा।
बांका में पहले बेहतर स्थिति, अब सख्ती
पिछले एक साल में बांका निबंधन कार्यालय में 12,396 जमीन की रजिस्ट्री हुई थी, जिससे सरकार को अच्छा राजस्व मिला था। इसके बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी होने के कारण विभाग ने नियमों को और सख्त करने का फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि GIS आधारित सत्यापन से पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व संग्रह में भी तेजी आएगी।







