बिहार में राजस्व विभाग पर बड़ी कार्रवाई, 13 अफसरों पर कसा शिकंजा; दाखिल-खारिज से लेकर भ्रष्टाचार तक के आरोप
Bihar News: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिकारियों की कार्यशैली और राजस्व मामलों के निष्पादन में कथित अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 1 सितंबर 2026 को मंत्री स्तर पर संचिकाओं में दिए गए दंड/अनुमोदित आरोप पत्र की विवरणी में कुल 13 अधिकारियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में दाखिल-खारिज में गड़बड़ी, गलत प्रमाण पत्र जारी करने, सरकारी कार्यों में लापरवाही, अनधिकृत अनुपस्थिति, बिचौलियों के माध्यम से राशि लेने के आरोप से लेकर न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही तक के मामले शामिल हैं।
विभागीय कार्रवाई की स्थिति सभी मामलों में एक जैसी नहीं है। कहीं आरोप पत्र गठित किया गया है तो कहीं अनुशासनिक कार्यवाही चल रही है। कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों से जांच रिपोर्ट के आधार पर अभ्यावेदन मांगा गया है, जबकि गंभीर मामलों में अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।
दाखिल-खारिज में अनियमितता से लेकर दोहरी जमाबंदी तक के आरोप
विभागीय विवरण के अनुसार, नवादा के तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता गौरव शंकर पर टाइटल सूट लंबित रहने के बावजूद दाखिल-खारिज अपील वाद में अपीलकर्ता के पक्ष में निर्णय देने जैसे आरोप हैं। उनके खिलाफ गठित आरोप पत्र को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है।
वहीं, तत्कालीन अंचल अधिकारी शेखपुरा एवं वर्तमान में सेवानिवृत्त ओम प्रकाश पर गलत जाति प्रमाण पत्र जारी करने और आरोप पत्र के संबंध में स्मारों एवं प्रेस विज्ञप्ति के बावजूद अपना लिखित बचाव प्रस्तुत नहीं करने का आरोप है। मामले में अनुशासनिक कार्यवाही संचालित की जा रही है।
गढ़पुरा, बेगूसराय की तत्कालीन सीओ और वर्तमान सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी स्मिता कुमारी के खिलाफ सरकारी कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं लेने, दाखिल-खारिज मामलों को निर्धारित समय सीमा के बाद भी लंबित रखने तथा गलत प्रतिवेदन भेजकर अधिकारियों को गुमराह करने जैसे आरोपों की जांच के बाद अभ्यावेदन मांगा गया है।
बिचौलिये के जरिए पैसे लेने के आरोप ने बढ़ाई गंभीरता
लखीसराय की तत्कालीन सीओ सुप्रिया आनंद के खिलाफ कार्यालय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, पंचायत प्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार करने और राजस्व कार्यों, खासकर परिमार्जन एवं दाखिल-खारिज के निपटारे के लिए बिचौलिये के माध्यम से राशि लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है।
घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण के तत्कालीन सीओ एवं वर्तमान में उदवंतनगर, भोजपुर के सीओ आनन्द कुमार के खिलाफ भी अनधिकृत अनुपस्थिति, राजस्व संबंधी कार्यों में रुचि नहीं लेने और कार्यालय पंजी को अद्यतन नहीं रखने जैसे आरोपों को लेकर आरोप पत्र गठित किया गया है।
फुलवारीशरीफ में दोहरी जमाबंदी का मामला
फुलवारीशरीफ, पटना के तत्कालीन सीओ चंदन कुमार के मामले में कार्रवाई का आधार दाखिल-खारिज वाद संख्या 11414/2022-23 बताया गया है। आरोप है कि रकबा से अधिक दाखिल-खारिज स्वीकृत कर दोहरी जमाबंदी कायम की गई और विभागीय पोर्टल पर जमाबंदी में छेड़छाड़ की गई।
मामले में पदीय दायित्व के प्रति लापरवाही, कर्तव्यहीनता और स्वेच्छाचारिता जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इस मामले में अनुशासनिक कार्यवाही संचालित है।
दानापुर के तत्कालीन सीओ के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति
दानापुर के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में मनिहारी, कटिहार के सीओ चंदन कुमार से जुड़े मामले में विभाग ने अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। वे दानापुर कांड संख्या 1163/2025, दिनांक 8 नवंबर 2025 के प्राथमिकी अभियुक्त बताए गए हैं।
विभागीय विवरण के अनुसार, इस मामले में अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रस्ताव विधि विभाग को भेजा गया है।
कई अधिकारियों पर राजस्व कार्यों में लापरवाही के आरोप
महुआ, वैशाली के सीओ मणि कुमार वर्मा से जुड़े मामले में आर्थिक अपराध इकाई से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में दाखिल-खारिज मामलों के अवैध तरीके से निष्पादन और पार्टीशन सूट लंबित रहने के बावजूद दाखिल-खारिज स्वीकृत करने जैसे आरोपों का उल्लेख है। मामले में जांच प्रतिवेदन के आधार पर अभ्यावेदन/निवेदन मांगा गया है।
मानपुर, गया के तत्कालीन सीओ एवं वर्तमान में चोरौत, सीतामढ़ी के सीओ सुबोध कुमार के खिलाफ भी विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित किया गया है।
इसी तरह भू-अर्जन कार्यालय दरभंगा के तत्कालीन राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो मो. शाकिब अलाउद्दीन के खिलाफ स्थानांतरण के बाद बंदोबस्त कार्यालय, लखीसराय में योगदान नहीं करने से संबंधित आरोप का मामला सामने आया है। वहीं परबत्ता, खगड़िया के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में नानपुर, सीतामढ़ी के सीओ चंदन कुमार पर गलत केवाला के आधार पर दाखिल-खारिज वाद स्वीकृत करने का आरोप है।
हाईकोर्ट के आदेश से जुड़े मामले में भी कार्रवाई
बगहा-2 के तत्कालीन सीओ निखिल के मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख किया गया है। सीडब्ल्यूजेसी संख्या 14700/2016 में समय पर प्रति शपथ पत्र दाखिल नहीं करने के कारण अदालत की ओर से 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का मामला विभागीय विवरण में दर्ज है।
वहीं रहिका, मधुबनी के तत्कालीन सीओ एवं वर्तमान में सेवानिवृत्त राम प्रवेश प्रसाद से जुड़े मामले में अभियान बसेरा-2, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और आधार सीडिंग सहित विभिन्न कार्यों की प्रगति रिपोर्ट असंतोषजनक पाए जाने का उल्लेख है।
कार्रवाई से राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही का संदेश
राजस्व विभाग से जुड़े इन मामलों में सामने आई कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकार दाखिल-खारिज, जमाबंदी, परिमार्जन और अन्य भूमि संबंधी सेवाओं में लापरवाही या कथित अनियमितता को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हालांकि, विभागीय आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा। फिलहाल अलग-अलग मामलों में आरोप पत्र, अनुशासनिक कार्रवाई, अभ्यावेदन की मांग और अभियोजन स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं चल रही हैं।







