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शादी का दबाव, बेच दीं किताबें, 4 बार UPSC में फेल, फिर… 5वीं कोशिश में प्रिया ने हासिल की 232वीं रैंक!

Success Story of Bihar's Daughter Priya Kumari:  बिहार की प्रिया कुमारी ने UPSC CSE 2025 में 232वीं रैंक हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया. सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली प्रिया ने 12वीं में 94% अंक हासिल किए और CS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 21 प्राप्त की. UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें परिवार की ओर से शादी का दबाव भी झेलना पड़ा.
 
BIHAR SUCCESS REAL STORY 2026

Patna:  संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि असफलताओं के बाद दोबारा खड़े होने का जज्बा भी जरूरी है। बिहार की प्रिया कुमारी की कहानी इसी जिद और संघर्ष की मिसाल है। परिवार की उम्मीदों, शादी के दबाव, आर्थिक चुनौतियों और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद प्रिया ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। आखिरकार UPSC CSE 2025 में 232वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर लिया।

Priya Singh UPSC Success Story in Hindi

सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर

प्रिया कुमारी का सफर बिहार के पटना जिले के एक गांव से शुरू हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। पढ़ाई में शुरू से ही बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रिया ने 12वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए।

इसके बाद उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी यानी CS की पढ़ाई की और इसमें ऑल इंडिया रैंक 21 हासिल की। इस सफलता ने उनके भीतर यह विश्वास पैदा किया कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

CS के बाद प्रिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला लिया।

शादी का दबाव भी नहीं रोक पाया सपना

UPSC की तैयारी के दौरान प्रिया के सामने परीक्षा की चुनौती के साथ-साथ पारिवारिक दबाव भी था। परिवार के कुछ सदस्य चाहते थे कि वह शादी कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ें। उनके दादा और पिता भी उनकी शादी के पक्ष में थे।

हालांकि, प्रिया अपने करियर और UPSC के सपने को लेकर स्पष्ट थीं। उन्होंने परिवार के सामने अपनी बात रखी और तय किया कि UPSC की तैयारी का खर्च वह अपनी नौकरी की कमाई से खुद उठाएंगी।

इस मुश्किल दौर में उनकी मां और भाई ने उनका साथ दिया। परिवार को समझाने के बाद प्रिया ने पूरी तरह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया।

पहली कोशिश से नहीं मिली सफलता

प्रिया ने UPSC का पहला प्रयास पूरी तैयारी के साथ नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने परीक्षा को गंभीरता से लेते हुए अपनी तैयारी शुरू की। लेकिन सफलता उनके लिए आसान नहीं रही।

2023 और 2024 में प्रीलिम्स में वह महज एक-दो अंकों के अंतर से असफल हो गईं। इतनी नजदीक पहुंचकर बार-बार सफलता से चूकना किसी भी अभ्यर्थी के लिए निराशाजनक हो सकता है। लेकिन प्रिया ने असफलता को अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया।

उन्होंने हर प्रयास के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि आखिर कमी कहां रह गई। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और कमजोर हिस्सों पर ज्यादा ध्यान दिया।

ज्यादा किताबें नहीं, सीमित स्टडी मटीरियल पर फोकस

UPSC की तैयारी के दौरान प्रिया को महसूस हुआ कि बहुत ज्यादा स्टडी मटीरियल उनके लिए मददगार होने के बजाय बोझ बन रहा है। इसके बाद उन्होंने अपनी कई पुरानी किताबें बेच दीं।

उन्होंने तैयारी के लिए करीब 25 से 30 जरूरी किताबों को चुना और उन्हीं पर बार-बार फोकस किया। उनका मानना था कि ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ने के बजाय सीमित और जरूरी सामग्री को अच्छी तरह पढ़ना और समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

प्रिया ने सोशियोलॉजी को ऑप्शनल विषय के रूप में चुना। इसके साथ ही उन्होंने स्टैटिक विषयों की तैयारी पर भी विशेष ध्यान दिया।

चार बार असफलता, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

UPSC की तैयारी के दौरान प्रिया को लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने चार प्रयासों में सफलता हासिल नहीं की, लेकिन हर असफलता के बाद उन्होंने अपनी रणनीति को बेहतर किया।

प्रिया की कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि असफलता के बाद रुकने के बजाय अपनी गलतियों को पहचानकर आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने हर प्रयास को सीखने का अवसर बनाया और अपनी तैयारी को लगातार बेहतर करती रहीं।

पांचवें प्रयास में पूरा हुआ IAS बनने का सपना

आखिरकार प्रिया की मेहनत रंग लाई। UPSC CSE 2025 में उन्होंने ऑल इंडिया 232वीं रैंक हासिल की। इंटरव्यू में उन्हें 194 अंक मिले।

इसके अलावा तैयारी के दौरान उन्होंने BPSC प्रीलिम्स भी पास किया। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि UPSC में पांचवें प्रयास में सफलता हासिल करना रही।

प्रिया कुमारी की कहानी देती है बड़ा संदेश

प्रिया कुमारी की सफलता की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ UPSC में मिली एक रैंक की कहानी नहीं है। यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें एक छोटे से गांव और सरकारी स्कूल से पढ़कर निकली लड़की ने बड़े लक्ष्य का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष किया।

शादी का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, लगातार चार असफल प्रयास और प्रीलिम्स में महज कुछ अंकों से चूकने के बावजूद प्रिया ने अपने सपने को नहीं छोड़ा।

उनकी कहानी बताती है कि सफलता हमेशा पहली कोशिश में नहीं मिलती। कई बार मंजिल तक पहुंचने के लिए बार-बार गिरना और हर बार खुद को पहले से मजबूत बनाकर उठना पड़ता है।