मनरेगा से बदली गांवों की तस्वीर: पश्चिम चंपारण में थमा मजदूरों का पलायन, 51 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार
Bihar news: पश्चिम चंपारण जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना ग्रामीणों के लिए रोजगार का बड़ा सहारा बनकर उभरी है। जिले के सैकड़ों पंचायतों में चल रही विकास योजनाओं के कारण अब बड़ी संख्या में मजदूरों को अपने ही गांव और पंचायत में काम मिल रहा है, जिससे रोजगार की तलाश में होने वाला पलायन काफी हद तक रुक गया है।

जिले की 318 पंचायतों में वर्तमान समय में 51 हजार से अधिक मजदूर मनरेगा के तहत विभिन्न विकास कार्यों में लगे हुए हैं। ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत, मिट्टीकरण, पौधरोपण समेत कई योजनाओं पर लगातार काम चल रहा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से मजदूर अब अपने परिवार के साथ रहकर जीविकोपार्जन कर पा रहे हैं और बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे रहे हैं।
लौरिया प्रखंड के बसवरिया पराउटोला पंचायत में कार्यरत मनरेगा मजदूरों ने बताया कि पहले रोजगार के लिए उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब पंचायत स्तर पर ही नियमित काम मिल जाने से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। मजदूरों ने कहा कि गांव में ही रोजगार मिलने से पारिवारिक जीवन बेहतर हुआ है।
भीषण गर्मी को देखते हुए कई पंचायतों में मजदूरों के लिए पेयजल और हल्के नाश्ते की भी व्यवस्था की जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि मजदूरों को काम के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बसवरिया पराउटोला पंचायत के मुखिया ई. शैलेश कुमार और पंचायत रोजगार सेवक अरविंद मणि तिवारी ने बताया कि मनरेगा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत में फिलहाल पांच विकास योजनाओं पर 350 से अधिक पंजीकृत मजदूर कार्य कर रहे हैं और उन्हें समय पर मजदूरी का भुगतान भी किया जा रहा है।
वहीं, पश्चिम चंपारण के उप विकास आयुक्त काजले वैभव ने बताया कि जिले में 51 हजार से अधिक मनरेगा श्रमिक विभिन्न विकास कार्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से मनरेगा योजना को नए स्वरूप में लागू किया जाएगा, जिसके तहत मजदूरों को पहले के 100 दिनों की बजाय साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। यदि किसी पंजीकृत श्रमिक को काम नहीं मिलता है, तो उसे नियमानुसार भत्ता भी दिया जाएगा।
उप विकास आयुक्त ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण परिसंपत्तियों के विकास, आजीविका संवर्धन और जलवायु अनुकूल योजनाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को गति देने में मनरेगा योजना की भूमिका लगातार मजबूत होती दिख रही है। इससे न केवल गांवों का विकास हो रहा है, बल्कि मजदूरों का पलायन भी थम रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।







