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बिहार विधानसभा में अग्नि सुरक्षा का मॉक ड्रिल, अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार बोले- ‘जन-जन तक पहुंचे जागरूकता’

 
बिहार विधानसभा में अग्नि सुरक्षा का मॉक ड्रिल, अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार बोले- ‘जन-जन तक पहुंचे जागरूकता’
Bihar News: बढ़ती गर्मी और अग्नि दुर्घटनाओं की आशंकाओं के बीच बिहार विधानसभा परिसर में गुरुवार को व्यापक अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। बिहार अग्निशमन सेवा के अधिकारियों द्वारा विधानसभा के मुख्य भवन, उप भवन और विस्तारित भवन में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच करते हुए आग से बचाव और त्वरित राहत संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी, प्रारंभिक बचाव उपायों और विभिन्न अग्निशामक उपकरणों के उपयोग का प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने कर्मचारियों को बताया कि आपात स्थिति में किस प्रकार सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बड़े हादसों को टाला जा सकता है।

अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने किया निरीक्षण

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से अग्नि सुरक्षा के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। ऐसे में जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर तक लोगों को अग्नि सुरक्षा और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।

अग्निशमन कर्मियों को पौधा देकर किया सम्मानित

मॉक ड्रिल के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष ने अग्निशमन सेवा के अधिकारियों और कर्मियों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया तथा आपदा प्रबंधन और जन सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

कर्मचारियों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन

इससे पहले विधानसभा के विस्तारित भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अग्नि सुरक्षा पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में आग लगने के संभावित कारणों, उससे बचाव के उपायों, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और अग्निशामक यंत्रों के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।

सुरक्षा को लेकर विधानसभा का विशेष अभियान

अग्नि सुरक्षा को लेकर आयोजित इस मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करना था। अधिकारियों का मानना है कि समय-समय पर इस तरह के अभ्यास से आपदा के समय जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।