मुकेश सहनी का CEC ज्ञानेश कुमार पर विवादित बयान, बोले- ‘एक खून माफ होता तो गोली मार देते’; SIR पर भी उठाए सवाल
Bihar News: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गुरुवार को बेहद विवादित बयान दिया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी मिल जाए तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देंगे। हालांकि, इसी बयान में उन्होंने खुद को संविधान और कानून में विश्वास रखने वाला नागरिक भी बताया। उनके इस बयान की रिपोर्टिंग कई मीडिया संस्थानों ने की है।
सहनी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना
मुकेश सहनी ने हाल में सामने आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के संचालन जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के सभी आधिकारिक फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
‘सरकार को बदनाम करने’ का लगाया आरोप
सहनी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पक्षपात का आरोप लगाया और दावा किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये सहनी के राजनीतिक आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
2029 चुनाव को लेकर भी किया दावा
VIP प्रमुख ने 2029 के आम चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि विपक्ष सत्ता में आता है तो मौजूदा व्यवस्था से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ऐसे लोगों में शामिल होंगे जिन पर कार्रवाई हो सकती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई।
ये राजनीतिक दावे हैं, किसी न्यायिक या आधिकारिक कार्रवाई का वर्तमान निष्कर्ष नहीं।
चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ी बहस
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार आयोग के नाम पर जारी फैसलों या आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने-बहाल करने, फॉर्म-6 और वोटर डेटाबेस से जुड़े मामलों से जोड़ा गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक निर्णयों पर तीनों आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति की बात कही गई है।
मुकेश सहनी के ताजा बयान ने अब इस पूरे विवाद को बिहार की राजनीति में भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।







