Nalanda News: वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, 5 सितंबर की ‘कफन यात्रा’ में जुटने का आह्वान
Nalanda: वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को नालंदा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। राज्यव्यापी आंदोलन के तहत अस्पताल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिहार में वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था को चार दशक से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान इन संस्थानों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने सीमित संसाधनों के बीच बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम किया, लेकिन लंबे समय से उन्हें नियमित वेतन, सेवा सुरक्षा और दूसरी सामाजिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
‘शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई’
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक सिन्हा ने कहा कि वित्त रहित संस्थानों में काम करने वाले शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने और ऐसे संस्थानों के शिक्षकों-कर्मचारियों के समायोजन की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं शिक्षकों के लिए जरूरी हैं। वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मियों को उनके अधिकार मिलना चाहिए।
अरवल से शुरू हुआ था आंदोलन
कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत 30 जून को अरवल से की गई थी। नालंदा इस अभियान का 37वां जिला है, जहां वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ वेतन या सेवा शर्तों का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों शिक्षक परिवारों के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
क्या हैं कांग्रेस की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन के दौरान वित्त रहित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों के समायोजन की मांग उठाई गई। इसके साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नियमित वेतनमान तथा सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई।
कांग्रेस नेताओं ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन और अन्य लाभ देने, दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू करने की भी मांग रखी।
इसके अलावा प्रखंड स्तर पर डिग्री कॉलेज स्थापित करने की योजना में पहले से संचालित वित्त रहित महाविद्यालयों को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई।
5 सितंबर को पटना में ‘कफन यात्रा’
धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आगामी 5 सितंबर को पटना में प्रस्तावित ‘कफन यात्रा’ को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नालंदा से बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, छात्र, अभिभावक और कांग्रेस कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। नालंदा में हुए प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने राज्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के साथ ही आगामी आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया।







