पटना में राष्ट्रीय लोक अदालत का बड़ा असर: 7033 मामलों का हुआ निपटारा, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पहल से बिछड़े दंपति फिर हुए एक
यह आयोजन नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के निर्देश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष रूपेश देव की अध्यक्षता तथा सचिव पल्लवी आनंद के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संगम कुमार सहो (मुख्य न्यायाधीश, पटना हाई कोर्ट) की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
मुख्य न्यायाधीश की पहल से टूटा मनमुटाव
लोक अदालत के दौरान एक भावुक क्षण तब देखने को मिला जब मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने परिवार न्यायालय से जुड़े एक मामले में खुद पहल कर पति-पत्नी को समझाया। यह मामला भरण-पोषण से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने पति पर केस दर्ज कराया था।बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव पवन कुमार पांडेय और सहायक निबंधक श्रीमती सिया श्रुति की सक्रियता से पूरे बिहार में उक्त लम्बित मामलों के निष्पादन के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में ही पूरे राज्य में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव पद पर पवन कुमार पांडेय के योगदान करने के बाद से लगातार विधिक सेवा से संबंधित विभिन्न स्थानों और विभिन्न विषयों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है।

मुख्य न्यायाधीश के समझाने पर दोनों पक्षों ने पुराने मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला किया। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद दोनों ने एक-दूसरे को गुलाब का फूल देकर नए जीवन की शुरुआत का संकेत दिया।

दूसरे मामले में भी परिवार को मिला नया मौका
इसी तरह विवाह पुनर्स्थापना से जुड़े एक अन्य मामले में भी मुख्य न्यायाधीश की मध्यस्थता से पति-पत्नी के बीच समझौता हुआ। तीन बच्चों के माता-पिता इस दंपति ने भी आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया।
पटना न्यायमंडल में 58 पीठों का गठन
लोक अदालत के लिए पटना सदर में 22 पीठ और पूरे पटना न्यायमंडल में 58 पीठों का गठन किया गया। यह आयोजन पटना के अलावा पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, मसौढ़ी और पालीगंज में भी किया गया।
करोड़ों रुपये की वसूली और हजारों मामलों का निपटारा
लोक अदालत में बैंक, बीएसएनएल और ट्रैफिक से जुड़े 3251 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे करीब 10.87 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा सुलहनीय आपराधिक मामलों, एनआई एक्ट, श्रम वाद, मोटर दुर्घटना और बिजली से जुड़े मामलों का भी आपसी सहमति से समाधान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान महानिबंधक प्रदीप कुमार मलिक ने भी विभिन्न पीठों का निरीक्षण किया। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पारा-लीगल वालंटियर्स और बैंक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से लोक अदालत का आयोजन सफल रहा।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोक अदालत केवल विवाद सुलझाने का मंच ही नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने का भी माध्यम बन सकती है।







