नीतीश कैम्प की नई चाल? जदयू से लड़ सकते हैं अनंत सिंह, बेल के बाद सियासी हलचल तेज
Patna: मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी। अनंत सिंह इस समय पचमहला थाना कांड संख्या 5/2025 में जेल में बंद थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जल्द ही वह जेल से बाहर आ सकते हैं।
चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह का जेल से बाहर आना बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। खबर है कि वो इस बार जदयू के टिकट पर फिर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। अभी मोकामा सीट से उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक हैं, जो फरवरी 2024 में राजद छोड़कर भाजपा समर्थित खेमे में चली गई थीं।
कोर्ट ने किन शर्तों पर दी बेल?
हाईकोर्ट की जस्टिस चंद्रशेखर झा की एकल पीठ ने अनंत सिंह को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ जमानत दी है। कोर्ट ने यह साफ किया कि अनंत सिंह को नियमित तौर पर कोर्ट की सुनवाई में शामिल होना होगा और किसी भी आपराधिक गतिविधि से खुद को दूर रखना होगा।
वकील की तीन दलीलें बनीं रिहाई की वजह
अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट में तीन मुख्य तर्क रखे, जो उनकी जमानत की वजह बने:
- हवा में की गई फायरिंग: वकील ने कहा कि अनंत सिंह ने जानबूझकर किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से फायरिंग नहीं की थी। यह सिर्फ हवाई फायरिंग थी और इससे किसी को चोट नहीं आई।
- जांच पूरी हो चुकी है: दूसरी दलील में कहा गया कि मामले की जांच पूरी हो गई है और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है, इसलिए अनंत सिंह को अब हिरासत में रखना जरूरी नहीं है।
- राजनीतिक साजिश का दावा: तीसरे तर्क में वकील ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि अनंत सिंह के खिलाफ अब तक 62 केस हुए हैं, जिनमें से 49 में वह बरी हो चुके हैं। केवल पुराने रिकॉर्ड के आधार पर बेल रोकी नहीं जा सकती।
क्या था मामला?
आपको याद दें कि, 22 जनवरी 2025 को बाढ़ के पचमहला इलाके में गोलीबारी हुई थी। मुकेश सिंह नाम के एक व्यक्ति ने अपने ऊपर लगे 68 लाख रुपये के गबन के आरोप में अनंत सिंह से मदद मांगी थी। बताया गया कि सोनू और मोनू नाम के दो लोगों ने मुकेश के घर पर ताला जड़ दिया था। अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और ताला तोड़ा। इसके बाद पास के नौरंगा गांव में दोनों पक्षों के बीच करीब 100 राउंड गोलीबारी हुई। इस घटना में एफआईआर उर्मिला देवी और तत्कालीन पुलिस पदाधिकारी प्रहलाद कुमार झा के बयान पर दर्ज हुई थी। अनंत सिंह ने 24 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
गांव में जश्न, 'छोटे सरकार' के स्वागत की तैयारी
बेल की खबर मिलते ही मोकामा स्थित उनके गांव नदावां में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने पटाखे फोड़े, मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जश्न मनाया। पूरे गांव में मानो होली और दिवाली एक साथ मनाई गई हो।
क्या अनंत सिंह लड़ेंगे अगला चुनाव?
सूत्रों की मानें तो अनंत सिंह एक बार फिर मोकामा से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं और इस बार वे जदयू के टिकट से मैदान में उतर सकते हैं। राजनीतिक जानकार इसे बड़ा बदलाव मान रहे हैं, खासकर जब उनकी पत्नी नीलम देवी ने राजद से नाता तोड़ भाजपा खेमे में जाते हुए सरकार के पक्ष में वोट दिया था। अब देखना होगा कि अनंत सिंह की इस वापसी से बिहार की सियासत में क्या नया मोड़ आता है।







