अब राहत में देरी नहीं! बिहार में आपदा पीड़ितों के लिए FAST TRACK सिस्टम, सर्पदंश पर 24 घंटे में भुगतान का आदेश
Bihar news: बिहार में आपदा पीड़ितों को राहत राशि मिलने में होने वाली देरी अब बीते दिनों की बात बनने जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत वितरण को तेज, पारदर्शी और संवेदनशील बनाने के लिए फास्ट ट्रैक मॉडल लागू करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत सर्पदंश पीड़ितों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा राशि देने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि अग्निकांड पीड़ितों को अधिकतम 15 से 20 दिनों में राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
पटना स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा पीड़ितों को समय पर सहायता मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सर्पदंश मामलों में बदली जाएगी प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में इलाज शुरू होने से पहले डॉक्टर द्वारा काटने के निशान की तस्वीर ली जाएगी, ताकि सत्यापन में देरी न हो। इसी आधार पर पीड़ित या उसके परिजनों को 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि भुगतान में अनावश्यक देरी की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।
अग्निकांड पीड़ितों को भी तय समय में राहत
अग्निकांड से प्रभावित परिवारों को लेकर भी सरकार ने समय-सीमा तय कर दी है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में राहत राशि 15 से 20 दिनों के भीतर हर हाल में पीड़ितों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि वे दोबारा जीवन पटरी पर ला सकें।
हर जिले में बनेगा एसडीआरएफ भवन
आपदा से निपटने की तैयारी को और मजबूत करने के लिए सभी जिलों में एसडीआरएफ भवन बनाने का निर्णय लिया गया है। मंत्री नारायण प्रसाद ने जिलाधिकारियों को जल्द से जल्द जमीन चिन्हित कर निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। साथ ही, एसी/डीसी और यूसी से जुड़े लंबित मामलों को तुरंत निपटाने को कहा गया।
फसल क्षति भुगतान में आएगी तेजी
बैठक में विभागीय सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर पहले से डाटा तैयार किया जाता है, जिससे आपदा के बाद फसल क्षति का भुगतान तेजी से किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को राहत राशि देने में किसी तरह की ढिलाई न हो। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सर्पदंश के मामलों में विसरा या पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कोई अनिवार्यता नहीं है।
शीतलहर से निपटने की व्यापक तैयारी
राज्य में शीतलहर को देखते हुए किए गए इंतजामों की भी बैठक में समीक्षा की गई। फिलहाल बिहारभर में 85 से अधिक रैन बसेरे संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक करीब 18 हजार जरूरतमंदों को आश्रय दिया गया है। ठंड से बचाव के लिए लगभग 5900 स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं, जिनमें 15 लाख किलोग्राम से ज्यादा लकड़ी का उपयोग हुआ है। इसके अलावा 42 हजार से अधिक कंबल वितरित किए गए हैं और मौसम से जुड़ी चेतावनियों के लिए 70 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे जा चुके हैं।
बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, आप्त सचिव पूर्णेन्दु कुमार, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और सभी जिलों के आपदा प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।
सरकार के इस फास्ट ट्रैक मॉडल से साफ है कि अब आपदा के समय पीड़ितों को राहत के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।







