अब पंचायत स्तर पर होगा समस्याओं का समाधान: बिहार में ‘सहयोग शिविर’ की शुरुआत आज से
सरकार की इस नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत सरकार भवन या उसके निकट सार्वजनिक स्थल पर सहयोग शिविर लगाया जाएगा। यह कार्यक्रम ग्राम पंचायतों में पहले से चल रहे सोमवार और शुक्रवार के जनसुनवाई कार्यक्रमों से अलग होगा।
शिविर में राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना, मनरेगा, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, सीमांकन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसी समस्याओं से जुड़े आवेदन लिए जाएंगे। साथ ही किसी भी सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत, सुझाव या समस्या पर भी सुनवाई होगी।
आवेदन से समाधान तक होगी रियल टाइम निगरानी
सरकार ने सहयोग शिविर को पूरी तरह जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए “सहयोग पोर्टल” और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर से शिकायतों के निस्तारण की निगरानी की जाएगी। यदि किसी आवेदन के समाधान में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी को आवेदक को लिखित रूप से अगली तिथि की जानकारी देनी होगी।
निर्देश के अनुसार आवेदन प्रक्रिया शिविर से 30 दिन पहले शुरू हो जाएगी, जबकि शिविर के दिन भी आवेदन जमा किए जा सकेंगे। संबंधित विभागों को 30 दिनों के भीतर शिकायतों के समाधान का लक्ष्य दिया गया है।
डीएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी
जिलाधिकारियों को पंचायतों में शिविरों की संख्या और आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिविर में पहुंचने वाले लोगों के लिए पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 भी जारी किया है, जहां सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
तीन प्रखंडों में प्रभारी मंत्री और सचिव करेंगे दौरा
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के निर्देश के अनुसार सहयोग शिविर के पहले दिन प्रभारी मंत्री कम से कम तीन प्रखंडों के शिविरों में शामिल होंगे। वहीं जिलों के प्रभारी सचिव भी शिविरों का निरीक्षण करेंगे और व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
पटना में 40 पंचायतों में लगेगा शिविर
राजधानी पटना में सहयोग शिविर को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने 57 नोडल अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है। पहले दिन जिले के विभिन्न प्रखंडों की 40 पंचायतों में शिविर लगाए जाएंगे। प्रत्येक शिविर में 19 विभागों के काउंटर और स्टॉल मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा भूमि सुधार, दाखिल-खारिज और लंबित मामलों से जुड़ी सूचनाओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि लोगों को अपने मामलों की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
जिला प्रशासन ने ग्रामीण लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहयोग शिविर में पहुंचकर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें।







