बिहार में बढ़ेगी पालना घरों की संख्या, 2026-27 तक 100 क्रेच स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत संचालित इन पालना घरों का उद्देश्य नौकरीपेशा महिलाओं और पुरुष कर्मियों को कार्यालय समय के दौरान अपने छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता से मुक्त करना है। यहां छह माह से लेकर पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को निशुल्क देखरेख, पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
वर्तमान में राज्य के जिला मुख्यालयों, पुलिस मुख्यालयों, कारागार परिसरों और विभिन्न सरकारी विभागों में कुल 79 पालना घर संचालित हैं। इनमें 38 जिला मुख्यालयों, 24 पुलिस मुख्यालयों, 9 काराओं और 8 सरकारी विभागों में यह सुविधा उपलब्ध है। सभी पालना घर सरकारी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
महिला कर्मियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह योजना काफी उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों की देखभाल के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। पालना घरों में बच्चों के लिए खेल-कूद, प्रारंभिक शिक्षा और आराम की समुचित व्यवस्था की गई है।
प्रत्येक पालना घर में एक क्रेच वर्कर और एक सहायक क्रेच वर्कर की तैनाती की जाती है। यहां दूध गर्म करने और भोजन तैयार करने के लिए इंडक्शन एवं केटल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होने वाले इन केंद्रों में एक समय में 10 बच्चों को रखने की क्षमता है।
सरकार का मानना है कि पालना घर योजना न केवल कामकाजी अभिभावकों के लिए सहायक साबित हो रही है, बल्कि बच्चों के शुरुआती विकास, पोषण और सुरक्षित देखभाल को भी सुनिश्चित कर रही है। आने वाले वर्षों में इसके विस्तार से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।







