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मुख्यमंत्री की घोषणा पर अफसरों ने लगाया ग्रहण! बिक गई चकिया चीनी मिल की जमीन, किसानों की उम्मीदें फिर संकट में

 
मुख्यमंत्री की घोषणा पर अफसरों ने लगाया ग्रहण! बिक गई चकिया चीनी मिल की जमीन, किसानों की उम्मीदें फिर संकट में

Bihar news: बिहार सरकार ने राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया, ताकि किसानों को लाभ मिले और रोजगार के नए अवसर बन सकें। सीतामढ़ी की रिगा चीनी मिल को दोबारा शुरू कर सरकार ने यह दिखाया भी है कि बंद मिल चालू होने से कैसे 400 लोगों को सीधी नौकरी और 32 हजार से ज्यादा लोगों को परोक्ष रोजगार मिला।

Motihari

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने अपनी “समृद्धि यात्रा” के दौरान 17 जनवरी को मोतिहारी पहुंचकर पूर्वी चंपारण की बंद मोतिहारी और बारा चकिया चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की घोषणा की। गांधी मैदान में खुले मंच से उन्होंने कहा कि किसानों के हित में इन मिलों को फिर से चालू किया जाएगा। इस ऐलान से इलाके के गन्ना किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों को लगा कि अब उनकी पुरानी परेशानी खत्म होने वाली है।

मोतिहारी

लेकिन इस घोषणा से पहले ही एक चौंकाने वाली बात सामने आ चुकी थी। 14 जनवरी को, यानी मुख्यमंत्री के मोतिहारी आने से तीन दिन पहले, चकिया चीनी मिल की जमीन आठ लोगों के नाम रजिस्ट्री होकर बिक चुकी थी। यह रजिस्ट्री जिला निबंधन कार्यालय में हुई थी।

Motihari

इतना ही नहीं, मोतिहारी के डीएम सौरभ जोरवाल ने अपने न्यायालय में चल रहे भू-हदबंदी वाद संख्या 1/2018 में 27 मई को ही चकिया चीनी मिल की जमीन बेचने की अनुमति दे दी थी। यानी मुख्यमंत्री के मंच से घोषणा करने से करीब सात महीने पहले ही जमीन बेचने का आदेश जारी हो चुका था।

डीएम सौरभ जोरवाल का कहना है कि चकिया चीनी मिल तकनीकी रूप से अब चालू नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि जो सरकारी जमीन बची है, उसके लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा।

अब सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री खुद मंच से चकिया चीनी मिल को फिर से चालू करने की बात कह रहे थे, तब जमीन बेचने की इजाजत पहले ही दी जा चुकी थी। ऐसे में किसानों और आम लोगों में भ्रम की स्थिति है।

सबकी नजर अब इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद क्या मोतिहारी के डीएम अपने उस आदेश पर दोबारा विचार करेंगे, जिसके तहत चकिया चीनी मिल की जमीन बेची गई, या फिर किसानों की उम्मीदें एक बार फिर टूट जाएंगी।