शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा से दूर होंगे सभी कष्ट, जानें शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र में आज आश्विन शुक्ल पंचमी को सौभाग्य योग और सिद्ध योग के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र में भगवती के पांचवे रूप में स्कन्द माता की पूजा हो रही है।
शारदीय नवरात्र में आज आश्विन शुक्ल पंचमी को सौभाग्य योग और सिद्ध योग के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र में भगवती के पांचवे रूप में स्कन्द माता की पूजा हो रही है।
पटना सिटी के बड़ी पटन देवी मंदिर में नवरात्र के पांचवें दिन भक्तों की लंबी कतार देखी गई। वहीं, मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी ने माता की आरती की और बिहार के सुख समृद्धि की कामना की।
आरती के दौरान 'जय माता दी' उद्घोष के साथ पूरा मंदिर परिसर भक्ति में डूब गया। मंदिर परिसर में बज रहे शंख, घंटा हुमाद की आहुति से पूरा इलाका सुगंधित हो उठा।
प्रेम और ममता की प्रतीक मां स्कंदमाता को विद्यावाहिनी, माहेश्वरी और गौरी भी कहा जाता है। मां स्कंदमाता स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय की माता हैं। देवी की गोद में स्वयं देव विराजमान हैं। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति की बुद्धि का विकास होता है, ज्ञान की प्राप्ति होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा मां अपने भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाती हैं। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने, व्रत रखने और कथा का पाठ करने या सुनने मात्र से ही संतान सुख के योग बनते हैं। जानें नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें, मुहूर्त, प्रिय भोग, रंग, मंत्र, कथा और आरती।
नवरात्रि के पांचवें दिन की देवी स्कंदमाता हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में मां ने भगवान कार्तिकेय को जन्म दिया था। स्वामी कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है। इसलिए मां दुर्गा के इस रूप को 'स्कंदमाता' कहा जाता है।
मां स्कंदमाता के स्वरूप की बात करें तो देवी चार भुजाओं वाली हैं। मां अपनी गोद में स्वामी कार्तिकेय को लेकर शेर पर विराजमान हैं। मां के दोनों हाथों में कमल है। मां के चेहरे पर सूर्य के समान तेज है। मां स्कंदमाता की पूजा में धनुष बाण अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
मां स्कंदमाता की पूजा करने के लिए नवरात्रि के पांचवें दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर लें और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और मां की तस्वीर या फोटो को स्थापित करें। अब पूजा में फल, फूल, मिठाई, लौंग, इलायची, धूप, दीप, अक्षत और पान का पत्ता आदि अर्पित करें। मां की कपूर और घी का दीपक जलाकर आरती उतारें। पूजा के बाद क्षमा याचना करके दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मां की कृपा से आपकी कामनाएं पूर्ण होंगी।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले या केले से बनी चीजों (जैसे खीर, हलवा या मिठाई) का भोग लगाया जाता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन पीला या सफेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा को पीले रंग के पुष्प अर्पित करने चाहिए। मान्यता है कि स्कंदमाता का प्रिय रंग पीला है। पीला रंग सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। इस रूप में मां के दर्शन करने से शांति मिलती है।







