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पटनासिटी का रहस्यमयी ‘पंजर भोंकवा मेला’: जहां शरीर के आर-पार गुजरती लोहे की छड़, फिर भी नहीं निकलता खून!

 
पटनासिटी का रहस्यमयी ‘पंजर भोंकवा मेला’: जहां शरीर के आर-पार गुजरती लोहे की छड़, फिर भी नहीं निकलता खून!

Patna City News: पटना सिटी के रानीपुर बभनगामा इलाके में लगने वाला सदियों पुराना ‘पंजर भोंकवा मेला’ आज भी अपनी अनोखी और रहस्यमयी परंपरा के लिए जाना जाता है। यह मेला न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अद्भुत और चौंकाने वाले रीति-रिवाजों के कारण लोगों को हैरान भी करता है।

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शरीर के आर-पार लोहे की छड़, फिर भी नहीं खून!

इस मेले की सबसे खास और चौंकाने वाली परंपरा है शरीर में लोहे के पंजर (छड़) भोंकना। श्रद्धालु इस अनुष्ठान को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान न के बराबर दर्द होता है और खून भी नहीं निकलता, जिसे लोग आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं।

बदलता दौर, लेकिन बढ़ती भीड़

समय के साथ इस परंपरा को निभाने वालों की संख्या भले ही कम हो रही हो, लेकिन इसे देखने आने वाले लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। हर साल हजारों की संख्या में लोग इस अनोखी परंपरा को देखने यहां पहुंचते हैं।

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“सुई जैसा लगता है दर्द”- प्रतिभागी

कई वर्षों तक इस परंपरा का हिस्सा रहे राजकुमार बताते हैं कि पंजर भोंकने के दौरान सिर्फ सुई चुभने जितना ही दर्द महसूस होता है। इस अनुष्ठान से पहले प्रतिभागियों को खान-पान में विशेष परहेज करना पड़ता है, खासकर खट्टे पदार्थों से दूर रहना होता है।

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जादू नहीं, हकीकत का खेल

जहां आमतौर पर ऐसे करतबों को जादू या ट्रिक माना जाता है, वहीं इस मेले में वास्तव में लोहे की छड़ शरीर के आर-पार की जाती है। यही वजह है कि यह परंपरा लोगों के लिए रहस्य और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

विरासत से जुड़ती नई पीढ़ी

यह मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। परिवार के साथ बच्चे भी इसमें शामिल होकर इस परंपरा को करीब से देखते और समझते हैं।

आस्था, साहस और रहस्य का अनोखा संगम रानीपुर का ‘पंजर भोंकवा मेला’ आज भी लोगों के विश्वास को जीवित रखे हुए है।

रिपोटर: मुकेश कुमार, पटना सिटी