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पटना कोर्ट का सख्त रुख: IPS एम. सुनील नायक को ट्रांजिट रिमांड से राहत, आंध्र पुलिस की अर्जी खारिज

 
पटना कोर्ट का सख्त रुख: IPS एम. सुनील नायक को ट्रांजिट रिमांड से राहत, आंध्र पुलिस की अर्जी खारिज
Bihar news: सोमवार को राजधानी में उस समय हलचल तेज हो गई जब आंध्रप्रदेश पुलिस की टीम 2005 बैच के बिहार कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी M. Sunil Nayak को ट्रांजिट रिमांड पर ले जाने के लिए पटना पहुंची। हालांकि, पटना सिविल कोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुलिस की मांग को खारिज कर दिया।

ACJM-12 की अदालत ने आवश्यक दस्तावेजों की कमी पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि बिना गिरफ्तारी वारंट और अपडेटेड केस डायरी के ट्रांजिट रिमांड की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला?

एम. सुनील नायक फिलहाल बिहार में आरक्षी महानिरीक्षक (अग्निशमन एवं फायर सर्विसेज) के पद पर तैनात हैं। वर्ष 2019 में वे प्रतिनियुक्ति पर आंध्रप्रदेश गए थे, जहां उन्होंने सीआईडी में डीआईजी के रूप में कार्य किया।

विवाद की जड़ 2021 का एक हाई-प्रोफाइल मामला है, जिसमें तत्कालीन सांसद K. Raghurama Krishna Raju को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पूर्व सांसद ने हिरासत के दौरान मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उसी प्रकरण में आईपीसी की धारा 307 समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष गिरफ्तारी वारंट प्रस्तुत नहीं किया गया और केस डायरी भी अद्यतन नहीं थी। इसे गंभीर चूक मानते हुए कोर्ट ने रिमांड आवेदन सीधे खारिज कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, आंध्रप्रदेश पुलिस के कुछ कर्मी बिना वर्दी कोर्ट पहुंचे थे, जिस पर भी सवाल उठे। अदालत ने उन्हें वहीं रुकने का निर्देश दिया।

बताया जाता है कि जुलाई 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले ने नया मोड़ लिया और जांच की प्रक्रिया तेज हुई। जांच अधिकारी की ओर से दो बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद कथित तौर पर निर्धारित तिथि पर उपस्थिति नहीं हुई, जिसके बाद आंध्र पुलिस की टीम पटना पहुंची।

शास्त्रीनगर आवास पर बढ़ी हलचल

सोमवार सुबह शास्त्रीनगर स्थित सरकारी आवास पर आंध्रप्रदेश पुलिस की मौजूदगी से माहौल गरमा गया। स्थानीय पुलिस की निगरानी में दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हुई। आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और होमगार्ड के जवान भी मौके पर जुट गए।

इस घटनाक्रम के दौरान बिहार और आंध्र अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।

कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल एम. सुनील नायक को राहत मिली है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। यदि वे आंध्रप्रदेश पुलिस के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखते हैं तो मामला पूछताछ तक सीमित रह सकता है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई और तेज हो सकती है।

यह प्रकरण अब दो राज्यों के बीच प्रशासनिक और कानूनी तालमेल की बड़ी परीक्षा बन गया है।