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पटना हाई कोर्ट का कड़ा फैसला: चोरी हुई गाड़ी को शराब केस में जब्त करना गलत, प्रशासनिक आदेश रद्द—3 दिन में वाहन रिहा करने और ₹10,000 मुआवज़ा देने का आदेश

 
पटना हाई कोर्ट का कड़ा फैसला: चोरी हुई गाड़ी को शराब केस में जब्त करना गलत, प्रशासनिक आदेश रद्द—3 दिन में वाहन रिहा करने और ₹10,000 मुआवज़ा देने का आदेश

Patna High Court: बिहार मद्यनिषेध कानून के तहत जब्त की गई अली अशरफ सिद्दीकी की गाड़ी पर की गई कार्रवाई को पटना हाई कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे पूरी तरह अनुचित करार दिया है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वाहन को तीन दिनों के भीतर रिहा किया जाए। अदालत ने कहा कि जब वाहन की चोरी की आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध है और मालिक की किसी भी प्रकार की संलिप्तता का प्रमाण नहीं मिलता, तो जब्ती और उसके बाद की कार्रवाई किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं ठहराई जा सकती।

चोरी की FIR के बावजूद जब्ती—कोर्ट ने उठाए सवाल

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं सतीश चंद्र मिश्रा और नुरुल होदा ने अदालत को बताया कि वाहन 6 मई 2024 को चोरी हो गया था, जिसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज भी है। काफी समय बाद यह गाड़ी शराब के साथ बरामद हुई, लेकिन इसके बावजूद जिला पंचायती राज पदाधिकारी, सीवान ने न केवल दंड राशि जमा करने का आदेश दिया, बल्कि नीलामी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा दी। यही नहीं, अपीलीय अधिकारी ने भी इस आदेश को सही ठहराया, जिससे मालिक पर और संकट बढ़ गया।

कोर्ट का कड़ा निर्देश—‘कानून के विरुद्ध कार्रवाई’

हाई कोर्ट ने दोनों आदेशों को कानून के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि चोरी की रिपोर्ट और मालिक की बेदाग स्थिति को नजरअंदाज करना प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारों का दुरुपयोग है।

इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को ₹10,000 मुकदमा-खर्च के रूप में भुगतान किया जाए।