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पटना की 432 एकड़ संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का मामला अटका, 31 अक्टूबर के बाद फैसले की उम्मीद

राजधानी के राजेंद्रनगर, श्रीकृष्णापुरी, कंकड़बाग और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे प्रमुख पॉश इलाकों में करीब 60 साल पहले 99 साल की लीज पर दी गई संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का मामला फिलहाल अधर में लटक गया है।
 
पटना

पटना के राजेंद्रनगर, श्रीकृष्णापुरी, कंकड़बाग और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने की योजना फिलहाल अधर में लटक गई है। करीब 60 साल पहले 99 साल की लीज पर आवंटित इन संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के लिए पटना नगर निगम ने लगभग एक महीने पहले नगर विकास एवं आवास विभाग को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, अब तक इस पर विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

आचार संहिता के कारण फैसले में देरी

मामले में फिलहाल सबसे बड़ी बाधा एमएलसी चुनाव को लेकर लागू आचार संहिता है। इसके प्रभावी रहने के कारण प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय होने की संभावना कम है। उम्मीद जताई जा रही है कि 31 अक्टूबर के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में फ्री-होल्ड की उम्मीद लगाए बैठे संपत्ति आवंटियों को अभी इंतजार करना पड़ेगा।

432 एकड़ में फैली हैं संपत्तियां

इन संपत्तियों का आवंटन पहले तत्कालीन पटना सुधार न्यास और बाद में पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार की ओर से किया गया था। प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव के बाद अब ये संपत्तियां पटना नगर निगम के अधीन हैं। करीब 432 एकड़ क्षेत्र में फैली इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों के अलावा फ्लैट, दुकानें और मकान भी शामिल हैं। राजधानी के कई महत्वपूर्ण इलाकों में स्थित होने के कारण इन संपत्तियों का मामला काफी अहम माना जा रहा है।

लीज की शर्तों से आवंटियों को परेशानी

99 साल की लीज पर आवंटित संपत्तियों के कारण मालिकाना हक से जुड़े कई मामलों में आवंटियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फ्री-होल्ड होने पर संपत्ति के अधिकारों और हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित नियमों, शुल्क और शर्तों पर विभाग का अंतिम फैसला महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग के स्तर पर लंबित है। अब सबकी निगाहें 31 अक्टूबर के बाद होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। विभाग के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इन संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने की प्रक्रिया कब और किन शर्तों पर आगे बढ़ेगी।