बिहार में शराबबंदी पर सियासी बवाल: अब NDA के भीतर से उठी आवाज, नई सरकार के सामने बड़ी परीक्षा
अपने ही घेर रहे सरकार
एनडीए विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी कानून पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि इससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। उनका तर्क है कि एक ओर सरकार को करोड़ों की आय का नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अवैध शराब का कारोबार लगातार जारी है। ऐसे में इस कानून की प्रभावशीलता पर पुनर्विचार जरूरी हो गया है।
मांझी भी पहले से हमलावर
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी लंबे समय से इस कानून के विरोध में रहे हैं। उनका कहना है कि शराबबंदी का सबसे ज्यादा असर गरीब और दलित समाज पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में लोग जेल में हैं, जबकि बड़े तस्कर अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। वे इस कानून की समीक्षा की मांग लगातार करते रहे हैं।
अनंत सिंह ने की खत्म करने की मांग
वहीं मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए शराबबंदी खत्म करने की मांग तक कर दी है। उन्होंने नई सरकार से इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करने की अपील की है, जिससे यह साफ हो गया है कि अंदरखाने यह मुद्दा अब और गरमाने वाला है।
जमीन पर असर पर उठे सवाल
2016 से लागू इस कानून के बावजूद राज्य में लगातार शराब की खेप पकड़ी जा रही है। जहरीली शराब से होने वाली मौतें और तस्करी का नेटवर्क इस कानून की सफलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से इसे सफल बनाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब अपने ही सहयोगियों के सवालों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
अब क्या करेगी सम्राट सरकार?
सबकी नजरें अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर टिकी हैं। क्या नई सरकार पुराने फैसले पर कायम रहेगी या बढ़ते दबाव के बीच कोई बड़ा बदलाव करेगी यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार में शराबबंदी एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ चुकी है।







