TRE-4 पर सियासत गरम: तेजस्वी का NDA पर बड़ा हमला, छात्रों के आंदोलन से बढ़ा सरकार पर दबाव
Patna News: बिहार में शिक्षक भर्ती के चौथे चरण (TRE-4) को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफी और अन्याय का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर पटना की सड़कों पर छात्र संगठन भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से NDA सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले युवाओं को बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए गए थे, लेकिन अब शिक्षक भर्ती को लेकर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में TRE-1 और TRE-2 के माध्यम से दो लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, जबकि लाखों पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
TRE-4 को लेकर बढ़ी बेचैनी
विपक्ष का आरोप है कि लंबे समय से TRE-4 भर्ती की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। इससे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना चाहिए।
पटना में छात्रों का प्रदर्शन, कई हिरासत में
इधर TRE-4 बहाली की मांग को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन भी तेज हो गया है। गांधी मैदान से लेकर BPSC कार्यालय तक प्रदर्शन, नारेबाजी और मार्च का दौर जारी है। पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्र नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि छात्र नेता दिलीप को जेल भेजे जाने के बाद आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया है।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं की गई और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
सरकार का आश्वासन, लेकिन नोटिफिकेशन का इंतजार
सरकार की ओर से पहले यह संकेत दिए गए थे कि TRE-4 का विज्ञापन जल्द जारी किया जाएगा। हालांकि अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना सामने नहीं आने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ी हुई है। यही वजह है कि छात्र संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
रोजगार बनाम राजनीति का मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TRE-4 अब सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के रोजगार, सरकार की जवाबदेही और विपक्ष की राजनीति का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। आगामी दिनों में यदि सरकार की ओर से कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता है, तो यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।







