बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर सियासत तेज, तेजस्वी बोले- ‘राशि घटाई जा रही, छात्रवृत्ति भी हो रही खत्म’
Bihar news: बिहार में विधानसभा चुनावी माहौल के बीच अब राज्य की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जबकि कर्मचारियों, पेंशनधारकों, ठेकेदारों और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े भुगतान में परेशानी की स्थिति बनी हुई है।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि राज्य की राजकोषीय स्थिति चिंताजनक है और सार्वजनिक ऋण में बीते वर्षों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, उनके बयान में किए गए विभिन्न आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
राजकोषीय घाटे को लेकर सरकार पर निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार के राजकोषीय घाटे को GSDP का 5.8 फीसदी बताते हुए इसे लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि लगातार बढ़ता घाटा और कर्ज राज्य की वित्तीय सेहत के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
उन्होंने सरकार से यह बताने की मांग की कि राजस्व संग्रह बढ़ाने, अनावश्यक खर्च को नियंत्रित करने और कर्ज के बोझ को सीमित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति क्या है।
कर्मचारियों से लेकर विकास योजनाओं तक भुगतान पर सवाल
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि वित्तीय दबाव का असर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के भुगतान पर पड़ रहा है। उन्होंने ठेकेदारों के बकाये और विकास कार्यों के भुगतान में देरी का भी दावा किया।
उन्होंने छात्र हितों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। तेजस्वी के मुताबिक स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत मिलने वाली राशि में कमी की गई है और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। हालांकि, इन दावों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।
‘दो साल में रिकॉर्ड कर्ज, फिर पैसा जा कहां रहा?’
आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में बिहार सरकार ने बड़े पैमाने पर कर्ज लिया, लेकिन इसके बावजूद सरकारी खजाना खाली होने की बात सामने आ रही है। इसी को लेकर उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर राज्य का पैसा कहां जा रहा है।
उन्होंने राजस्व बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए स्पष्ट नीति सामने रखने की मांग की।
आर्थिक मुद्दे पर भ्रष्टाचार का आरोप भी जोड़ा
तेजस्वी यादव ने बिहार की वित्तीय स्थिति पर हमला बोलते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार और कथित संगठित लूट के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है और राज्य को ऐसी दिशा में ले जाया जा रहा है, जिससे बिहार के वर्तमान के साथ-साथ भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक बयान और आधिकारिक आंकड़ों में फर्क जरूरी
तेजस्वी यादव के आरोपों के बाद बिहार की आर्थिक स्थिति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। हालांकि, राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन केवल राजनीतिक दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए बजट दस्तावेज, सार्वजनिक ऋण, राजस्व संग्रह, राजकोषीय घाटा और वास्तविक सरकारी व्यय जैसे आधिकारिक आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।
फिलहाल, तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार के कर्ज, राजकोषीय घाटे और सरकारी वित्तीय प्रबंधन को लेकर एनडीए सरकार के सामने नया राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।







