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ऊर्जा के मैदान में ‘पावरफुल’ बिहार! ग्लोबल समिट में निवेश का बड़ा संदेश, 81 हजार करोड़ की तैयारी

 
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Bihar News: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के मंच पर बिहार ने इस बार अपनी मौजूदगी सिर्फ औपचारिक नहीं रखी, बल्कि दमदार तरीके से यह संदेश दिया कि अब राज्य ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का बड़ा केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समिट में ‘फोकस स्टेट’ के रूप में बिहार की प्रस्तुति ने निवेशकों और उद्योग जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

पैवेलियन बना निवेश का हॉटस्पॉट
समिट में बिहार का पैवेलियन लगातार चर्चा में रहा। यहां पहुंचे देश-विदेश के प्रतिनिधियों ने राज्य की ऊर्जा योजनाओं और नीतियों को करीब से समझा। बीएसपीएचसीएल की टीम ने निवेशकों के साथ सीधा संवाद कर नई परियोजनाओं और साझेदारी के रास्ते तलाशे। इस दौरान कई अहम बैठकों में भविष्य के निवेश पर गंभीर चर्चा हुई, जिससे साफ है कि बिहार अब ग्लोबल एनर्जी मैप पर अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है।

20 साल में बदली तस्वीर, अंधेरे से उजाले तक सफर
बिहार की इस नई पहचान के पीछे पिछले दो दशकों में हुआ बड़ा बदलाव है। कभी 700 मेगावाट से भी कम बिजली पर निर्भर रहने वाला राज्य आज 8700 मेगावाट से अधिक की मांग पूरी कर रहा है। गांव-गांव और घर-घर तक बिजली पहुंच चुकी है और 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता इससे जुड़े हैं।

सिर्फ आपूर्ति ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़ा सुधार हुआ है- ट्रांसमिशन क्षमता में 20 गुना वृद्धि, ग्रिड सबस्टेशन 45 से बढ़कर 175 और वितरण नेटवर्क कई गुना मजबूत हुआ है। यही वजह है कि अब बिहार उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद पावर बेस बनता जा रहा है।

घाटे से मुनाफे तक का सफर
राज्य की बिजली कंपनियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। जहां कुछ साल पहले तक हजारों करोड़ का घाटा था, वहीं अब कंपनियां मुनाफे में पहुंच चुकी हैं। एटी एंड सी लॉस घटकर करीब 15% रह गया है और डिस्कॉम्स को ‘A’ रेटिंग मिलना इस बदलाव की बड़ी मिसाल है।

डिजिटल बिहार: स्मार्ट मीटर से पारदर्शिता
ऊर्जा क्षेत्र में डिजिटल क्रांति भी बिहार की बड़ी ताकत बनकर उभरी है। 87 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं, जिससे बिलिंग और राजस्व में पारदर्शिता आई है। ERP सिस्टम, IT डैशबोर्ड और कमांड सेंटर जैसी आधुनिक तकनीकों ने पूरे सिस्टम को स्मार्ट और जवाबदेह बना दिया है।

81 हजार करोड़ का मास्टर प्लान
राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा विजन तैयार किया है। करीब 81 हजार करोड़ रुपये के निवेश से बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा।

इसके साथ ही पीरपैंती की 30 हजार करोड़ की परियोजना, कजरा सोलर प्रोजेक्ट और पंप्ड स्टोरेज योजनाएं बिहार को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।

2030 तक ग्रीन एनर्जी का बड़ा लक्ष्य
नई नीति के तहत बिहार ने 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट स्टोरेज क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ट्रांसमिशन छूट, सिंगल विंडो सिस्टम और कार्बन क्रेडिट जैसे प्रावधान भी लागू किए जा रहे हैं।

स्पष्ट संदेश- अब ऊर्जा में लीडर बनने की तैयारी
इस समिट में बिहार की सक्रिय भागीदारी यह साफ संकेत देती है कि राज्य अब सिर्फ बिजली की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व करने और बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।