Newshaat_Logo

उद्योगों, होटलों और रेस्टोरेंट्स को राहत: बिहार चैम्बर के आग्रह पर वैकल्पिक ईंधन उपयोग की समयसीमा तीन माह बढ़ी, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को धन्यवाद

Bihar: बिहार चैम्बर ने अपने अनुरोध में यह बात प्रमुखता से उठाई थी कि राज्य के कई उद्योग, होटल और रेस्तरां अभी वैकल्पिक ईंधनों के पूर्ण रूप से उपयोग के लिए तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक तैयारियों के दौर में हैं. ऐसे में निर्धारित समयसीमा के भीतर नए ईंधन तंत्र को लागू करना कई इकाइयों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा था.
 
BIHAR

Bihar: बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अनुरोध पर राज्य के उद्योगों, होटलों एवं रेस्तरांओं को बड़ी राहत मिली है. वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को लेकर पूर्व में निर्धारित तिथि को तीन माह के लिए विस्तारित किए जाने के निर्णय पर चैम्बर ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया है.

बिहार चैम्बर ने अपने अनुरोध में यह बात प्रमुखता से उठाई थी कि राज्य के कई उद्योग, होटल और रेस्तरां अभी वैकल्पिक ईंधनों के पूर्ण रूप से उपयोग के लिए तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक तैयारियों के दौर में हैं. ऐसे में निर्धारित समयसीमा के भीतर नए ईंधन तंत्र को लागू करना कई इकाइयों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा था.

चैम्बर अध्यक्ष पी० के० अग्रवाल ने बताया कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद  ने पाइप्ड नेचुरल गैस(पीएनजी)/लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस(एलपीजी) के आपूर्ति में आ रहे व्यवधान को देखते हुए अपने पत्र दिनांक 12 मार्च 2026 को एक एडवाइजरी जारी करते हुए उद्योगों/होटलों/रेस्तरांओं को पर्यावरणीय मानदंडों का पालन करते हुए (पीएनजी)/(एलपीजी) के स्थान पर बायो-मास, आरडीएफ पेलेट्स आदि जैसे वैकल्पिक ईंधनों के अस्थायी उपयोग की अनुमति एक माह के लिए दी थी . 

अग्रवाल ने बताया कि चूँकि अभी भी पाइप्ड नेचुरल गैस(पीएनजी)/ लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस(एलपीजी) कि आपूर्ति सामान्य नही हो सका है और एक माह कि अवधि दिनांक 12 अप्रैल 2026 को समाप्त हो जाएगी, इसे देखते हुए चैम्बर कि ओर से दिनांक 4 अप्रैल 2026 को केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद एवं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को पत्र लिखकर मांग किया गया था कि उद्योगों/होटलों/रेस्तरांओं का परिचालन निर्वाध रूप से चलता रहे इसलिए वैकल्पिक ईंधनों के अस्थायी उपयोग कि जो पूर्व से तिथि निर्धारित कि गयी है उसे तीन माह के लिए और बढ़ाया जाये.

चैम्बर ने केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के इस व्यावहारिक और उद्योग–हितैषी निर्णय को पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन का एक सकारात्मक उदाहरण बताया है.