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50 लाख करोड़ निवेश का रोडमैप तैयार, बजट में उद्योगों को मिले 5% हिस्सेदारी-बिहार चैम्बर ने सरकार के सामने रखी बड़ी मांगें

 
50 लाख करोड़ निवेश का रोडमैप तैयार, बजट में उद्योगों को मिले 5% हिस्सेदारी-बिहार चैम्बर ने सरकार के सामने रखी बड़ी मांगें

Bihar news: बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने राज्य सरकार के 2026–27 के बजट से पहले अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं। चैम्बर अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल ने बजट-पूर्व बैठक में सरकार के समक्ष ऐसे ठोस सुझाव रखे हैं, जिनसे बिहार को निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

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अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगीकरण को लेकर जिस तरह का सकारात्मक माहौल बनाया है, वह सराहनीय है। अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की कार्ययोजना, सात लाख युवाओं को उद्योग-आधारित कौशल प्रशिक्षण, हर जिले में एमएसएमई केंद्र और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की योजना बिहार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

उन्होंने फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स को मजबूती देने के लिए पांच नए मेगा फूड पार्क, 10 औद्योगिक पार्क और 100 एमएसएमई पार्क विकसित करने के फैसले का स्वागत किया। साथ ही गया के डोभी में 1700 एकड़ में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और 29 जिलों में 31 नए औद्योगिक पार्क की योजना को राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए अहम बताया।

हालांकि, अग्रवाल ने उद्योग विभाग के मौजूदा बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2025–26 में कुल बजट का महज 0.5% (1966.26 करोड़ रुपये) उद्योग विभाग को मिला, जो प्रस्तावित औद्योगिक विस्तार के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने मांग की कि 2026–27 के बजट में इसे बढ़ाकर कम से कम 5% किया जाए।

चैम्बर की प्रमुख मांगों में बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 की समय-सीमा को एक साल बढ़ाना, बीआईएडीए के तहत एमएसएमई समेत सभी उद्यमों को भूमि आवंटन, भूमि बैंक की स्थापना और बड़े प्रोजेक्ट्स में सरकार की फेसीलिटेटर की भूमिका शामिल है। इसके अलावा गया–कैमूर क्षेत्र में नए औद्योगिक हब, उद्योगों के लिए फायर ऑडिट की अवधि पांच साल करने और बिजली दरों को पड़ोसी राज्यों के बराबर लाने की भी मांग उठाई गई।

पर्यटन को उद्योग से जोड़ने पर जोर देते हुए चैम्बर ने पावापुरी, काकोलत, विक्रमशिला, केसरिया, बराबर की गुफा, सीतामढ़ी जैसे स्थलों को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का सुझाव दिया। वहीं गंगा जलमार्ग को कार्गो परिवहन के लिए विकसित करने, स्थानीय उद्योगों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने और लंबित प्रोत्साहन राशि के मामलों के शीघ्र निपटारे की भी सिफारिश की गई।

अग्रवाल ने कहा कि यदि सरकार इन सुझावों को बजट में शामिल करती है, तो बिहार न सिर्फ औद्योगिक निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ राज्य की आर्थिक तस्वीर भी बदलेगी।