बिहार विधान परिषद में सैटेलाइट टाउनशिप पर बवाल, भाजपा-राजद सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक, सभापति को करना पड़ा हस्तक्षेप
Patna: बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्य सरकार की प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप योजना पर चर्चा के बीच सदन का माहौल अचानक गर्मा गया। योजना को लेकर शुरू हुई बहस देखते ही देखते भाजपा और राजद सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सदन में हंगामे की स्थिति बन गई, जिसके बाद सभापति अवधेश नारायण सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।
दरअसल, चर्चा के दौरान राजद सदस्य डॉ. सुनील सिंह ने सैटेलाइट टाउनशिप योजना के तहत भूमि अधिग्रहण और नियमों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में कई भूमि मालिकों को अपनी जमीन की खरीद-बिक्री में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से नियमों को स्पष्ट करने और लोगों की शंकाएं दूर करने की मांग की।
जदयू सदस्य नीरज कुमार ने भी इस मुद्दे पर किसानों और जमीन मालिकों के बीच फैली भ्रम की स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार से स्पष्ट नीति सामने रखने की अपील की।
सरकार की ओर से मंत्री नीतीश मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा कि सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर सभी आवश्यक नियम तय हैं और किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं है। हालांकि, विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और इस मुद्दे पर बहस जारी रही।
इसी दौरान भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने कहा कि टाउनशिप योजना का विरोध आम जमीन मालिक नहीं, बल्कि जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोग कर रहे हैं। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया। राजद सदस्य डॉ. सुनील सिंह ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया और सदन में माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ देर तक हंगामा और नारेबाजी भी होती रही, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
स्थिति बिगड़ती देख विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सभी सदस्यों से संयम बरतने, संसदीय भाषा का प्रयोग करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। सभापति के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर हुई इस तीखी बहस ने एक बार फिर साफ कर दिया कि राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।







