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सोन नदी पर ‘बालू माफिया’ का कब्जा! धारा रोककर अवैध खनन, वीडियो ने खोली सिस्टम की पोल

NGT नियमों की खुली धज्जियां, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल- रातभर चलता है अवैध कारोबार
 
सोन नदी पर ‘बालू माफिया’ का कब्जा! धारा रोककर अवैध खनन, वीडियो ने खोली सिस्टम की पोल
Bihar News: पटना जिले में बहने वाली सोन नदी अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझती नजर आ रही है। अवैध बालू खनन के एक वायरल वीडियो ने न केवल नदी संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जहां एक ओर सरकार नदियों को उनके पुराने स्वरूप में लौटाने और करोड़ों के बजट की बात कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

धारा रोककर किया जा रहा खनन

जीतन छपरा और मसौढा बालू घाट के पास सोन नदी की मुख्य धारा को ही बाधित कर दिया गया है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि भारी-भरकम पॉकलेन मशीनें नदी के बीचों-बीच बांध बनाकर बालू निकाल रही हैं।

यह गतिविधि न केवल अवैध है, बल्कि खनन अधिनियम 2019 और NGT की गाइडलाइन्स का खुला उल्लंघन भी है, जिसमें नदी की बहती धारा से खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

रात के अंधेरे में ‘बालू का खेल’

सूत्रों के मुताबिक, धाना बालू घाट समेत कई इलाकों में रातभर अवैध खनन का खेल चलता है। बिना चालान के सैकड़ों ट्रक और ट्रैक्टर नेशनल हाईवे से बेखौफ गुजरते हैं।

हैरानी की बात यह है कि तीन-तीन खनन निरीक्षकों और टास्क फोर्स की मौजूदगी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

वीडियो में जीपीएस लोकेशन और अवैध गतिविधियों के स्पष्ट सबूत होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी लोगों को चौंका रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रमुख मार्गों रानीतलाब, कनपा और सैदाबाद पर सख्त चेकिंग हो, तो इस अवैध कारोबार पर लगाम लग सकती है।

माफियाओं के हौसले बुलंद, पुलिस पर फायरिंग

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रानीतलाब क्षेत्र में बालू माफियाओं ने पुलिस पर फायरिंग तक कर दी। इस मामले में दर्जनों नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल

लगातार हो रहे अवैध खनन और कमजोर कार्रवाई ने सरकार के “जीरो टॉलरेंस” के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सोन नदी के साथ हो रहा यह खिलवाड़ पर्यावरण और भविष्य दोनों के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है।