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सुन्दर सिंह महाविद्यालय के प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल, अधूरी समिति से संचालन का आरोप; विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा

 
सुन्दर सिंह महाविद्यालय के प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल, अधूरी समिति से संचालन का आरोप; विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा

Shekhpura News: मुंगेर विश्वविद्यालय से संबद्ध सुन्दर सिंह महाविद्यालय, मेहुस के प्रशासनिक संचालन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि महाविद्यालय का संचालन पिछले करीब दो वित्तीय वर्षों से पूर्ण शासी निकाय के बिना किया जा रहा है। इससे वित्तीय और विकास संबंधी निर्णयों की वैधता पर भी सवाल उठने लगे हैं। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षाविद प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अंजेश कुमार को दोबारा मनोनीत किए जाने को लेकर भी चर्चा तेज है।

जानकारी के अनुसार, किसी भी संबद्ध महाविद्यालय के संचालन के लिए सात सदस्यीय शासी निकाय का गठन अनिवार्य होता है। इसमें विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, दाता सदस्य, शिक्षक प्रतिनिधि और प्राचार्य शामिल रहते हैं। यदि किसी कारणवश शासी निकाय का गठन नहीं हो पाता है तो विश्वविद्यालय छह माह के लिए तदर्थ समिति गठित करता है, जिसे अधिकतम एक बार और छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि महाविद्यालय के दाता सदस्य और शिक्षक प्रतिनिधि का कार्यकाल वर्ष 2025 में समाप्त हो चुका है। नियमानुसार इन पदों पर नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन अब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने से प्रबंधन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव नहीं होने की स्थिति में विश्वविद्यालय ने तदर्थ समिति का गठन किया था। इसमें शिक्षाविद के रूप में डॉ. अंजेश कुमार, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि प्रो. (डॉ.) रंजन कुमार सिंह, तत्कालीन विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी तथा महाविद्यालय के प्राचार्य को शामिल किया गया था। हालांकि, आरोप है कि वर्तमान में समिति के सभी सदस्य सक्रिय नहीं हैं और केवल कुछ सदस्यों की मौजूदगी में ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि अनुमंडल पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति के बावजूद बैठकें आयोजित की जा रही हैं। साथ ही विधानसभा चुनाव के बाद नए जनप्रतिनिधि का मनोनयन भी अब तक नहीं किया गया है। ऐसे में समिति की कार्यप्रणाली और उसके निर्णयों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

महाविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षक प्रतिनिधि और दाता सदस्य के चुनाव के लिए अधिसूचना समय पर जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन जून 2026 के अंतिम सप्ताह तक भी इस दिशा में कोई औपचारिक पहल नहीं हुई। इसी बीच डॉ. अंजेश कुमार को दोबारा शिक्षाविद प्रतिनिधि बनाए जाने से विश्वविद्यालय की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हालांकि, इन आरोपों पर मुंगेर विश्वविद्यालय या महाविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले में कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।