आयुर्वेद से इलाज को बढ़ावा: बिहार में सात नए आयुष अस्पताल खुलेंगे, 50-50 बेड की होगी सुविधा
Patna Desk: बिहार में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी पद्धति से इलाज को और मजबूत किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य के सात जिलों में 50-50 बेड वाले आयुष अस्पतालों का निर्माण शुरू किया जाएगा। इससे लोगों को इलाज की प्राचीन और भरोसेमंद पद्धति आयुर्वेद से आसानी से उपचार मिल सकेगा।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सोमवार को पटना के होटल चाणक्या में आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान दी। उन्होंने बताया कि बेगूसराय, दरभंगा, मोतिहारी, गोपालगंज, गया, मधुबनी और सीवान जिलों में इन आयुष अस्पतालों का निर्माण प्रस्तावित है।
कार्यशाला में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी पद्धति से जुड़े डॉक्टरों ने भाग लिया। यहां ऑस्टियोआर्थराइटिस, मस्कुलोस्केलेटल रोग, मोबाइल मेडिकल यूनिट, फाइलेरिया और अन्य स्वास्थ्य विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों से कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान अपने अनुभव साझा करें, ताकि उनके सुझावों के आधार पर सरकार बेहतर नीतियां बना सके।
मंगल पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में आयुष पद्धति को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में अभी 294 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ऐसे हैं, जहां आयुष पद्धति से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-सरकारी संस्थाओं को भी ऐसे प्रशिक्षण में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद आयुर्वेद पर लोगों का भरोसा और बढ़ा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि डॉक्टरों को और अधिक सक्षम बनाना है। अगले 15 दिनों में प्रशिक्षण के सभी चरण पूरे किए जाएंगे, इसके बाद जिला और प्रखंड स्तर पर शिविर लगाकर लोगों को इसका लाभ दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 114 चिकित्सक शामिल हुए हैं।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि मेहनत और अच्छे परिणाम से ही पहचान बनती है। उन्होंने डॉक्टरों से ईमानदारी से प्रशिक्षण लेकर सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग और आयुष समिति के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।







