चीनी के दाम में 40% उछाल से मचा हड़कंप, पटना में 75 रुपये किलो तक पहुंचा भाव; केंद्र के बाद बिहार में भी सख्ती
Bihar news: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब तीन महीनों में चीनी के दाम में लगभग 40 फीसदी तक की तेजी बताई जा रही है। पटना में खुदरा बाजार में इसका भाव करीब 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। चीनी के साथ गुड़, चावल और मक्के के आटे के दाम भी बढ़े हैं। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और बिहार सरकार ने अब जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
10 लाख टन रॉ शुगर के आयात को मंजूरी
घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 3 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार को उम्मीद है कि आयात से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और बढ़ती कीमतों पर दबाव कम होगा।
इसके साथ ही ऐसे थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा लागू की गई है, जिनकी मासिक खपत 10 टन से अधिक है। उन्हें अपनी 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी रखने की अनुमति होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत से ज्यादा स्टॉक करके बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
नए चीनी सीजन से पहले सप्लाई को लेकर चिंता
चीनी की कीमतों में तेजी की एक वजह आगामी 2026-27 चीनी सीजन को भी माना जा रहा है। नया सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होना है। अनुमान है कि उस समय शुरुआती स्टॉक घरेलू खपत के लिए जरूरी करीब 50 लाख टन से कम रह सकता है। सप्लाई को लेकर इसी आशंका ने बाजार में कीमतों को बढ़ावा दिया है।
इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन में अनाज और गन्ने से जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। पिछले साल देश में करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन हुआ था। इससे पशु आहार और पोल्ट्री फीड के लिए उपलब्ध कच्चे माल पर भी दबाव बढ़ा।
पशु आहार महंगा, दूध-अंडे पर भी असर
कच्चे माल की उपलब्धता घटने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड के दाम में करीब 8 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात सामने आ रही है। इसका असर आगे दूध और अंडे की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। इनकी कीमतों में करीब 5 से 10 फीसदी तक वृद्धि दर्ज की गई है।
यानी चीनी की महंगाई का असर केवल एक खाद्य वस्तु तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े दूसरे बाजारों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
बिहार में 400 टन से ज्यादा स्टॉक पर होगी कार्रवाई
पटना में चीनी के भाव 75 रुपये किलो तक पहुंचने के बाद बिहार सरकार ने भी निगरानी और कार्रवाई बढ़ा दी है। राज्य में 400 टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने वाले व्यापारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी के जिलाधिकारियों के साथ चीनी मिल संचालकों को स्टॉक की जांच कराने को कहा है।
चीनी मिलों और कारोबारियों के स्टॉक की होगी जांच
प्रशासन की ओर से वरीय उप समाहर्ता और ईख पदाधिकारी की संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें चीनी मिलों और व्यापारियों के यहां पहुंचकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेंगी।
सरकार के निर्देश के मुताबिक मिल से चीनी की बिक्री होने के बाद उसे अधिकतम सात दिनों के भीतर परिसर से बाहर करना होगा। वहीं केंद्र के निर्देश के तहत 30 नवंबर 2026 तक व्यापारियों के लिए अधिकतम 400 टन की स्टॉक सीमा लागू है।
अब कार्रवाई और आयात के असर पर नजर
चीनी के बढ़ते भाव ने त्योहारों से पहले आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सरकार ने एक तरफ आयात के जरिए बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश शुरू की है, तो दूसरी तरफ स्टॉक सीमा और जांच के जरिए जमाखोरी पर शिकंजा कसने की तैयारी की है।
अब देखना होगा कि 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात और बिहार में शुरू होने वाली स्टॉक जांच का बाजार पर कितना असर पड़ता है और पटना समेत दूसरे शहरों में चीनी के दाम आम उपभोक्ताओं को कितनी राहत देते हैं।







