सुपौल शोक में डूबा: शिक्षाविद कालीचरण मिश्रा का निधन, एक युग का हुआ अंत
कालीचरण मिश्रा केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक संस्था थे। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र आज देश-विदेश में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि बनकर समाज का नाम रोशन कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
उनके निधन पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा, भाजपा नेता नागेंद्र नारायण ठाकुर और कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी समेत कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की मांग भी उठी है।
अंतिम दर्शन के दौरान उनके पार्थिव शरीर के पास लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पुराने छात्र, शिक्षक और आम नागरिक नम आंखों से उन्हें विदाई देते नजर आए। हर जुबान पर एक ही बात थी- “मिश्रा जी जैसे गुरु विरले होते हैं।”
उनका अनुशासन, समर्पण और शिक्षा के प्रति जुनून आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। कालीचरण मिश्रा का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम शैक्षणिक युग का अंत है।







