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फार्मासिस्ट बहाली पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, सिर्फ डिप्लोमा फार्मेसी वालों को ही मिलेगी नौकरी

 
Bihar news

Bihar news: बिहार में फार्मासिस्ट बहाली को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राज्य में फार्मासिस्ट पद पर नियुक्ति के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) होना अनिवार्य है। बी फार्म, एम फार्म या फार्म डी डिग्रीधारी अगर डिप्लोमा फार्मेसी नहीं रखते हैं, तो वे इस पद के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पटना हाई कोर्ट के 72 पन्नों के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया। इसके साथ ही बी फार्म, एम फार्म और फार्म डी डिग्रीधारियों की ओर से दायर सभी 6 याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

क्या था पूरा मामला?

बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने फार्मासिस्ट के 2473 पदों पर नियमित बहाली के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें शैक्षणिक योग्यता के रूप में इंटर साइंस, डिप्लोमा इन फार्मेसी और बिहार फार्मेसी काउंसिल में निबंधन को अनिवार्य रखा गया था।

इस नियम के खिलाफ कुछ बी फार्म और एम फार्म डिग्रीधारियों ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें भी फार्मासिस्ट बहाली में शामिल किया जाए। हाई कोर्ट ने 2023 में साफ कहा कि फार्मासिस्ट पद के लिए डिप्लोमा फार्मेसी जरूरी है और बिना डिप्लोमा वाले अभ्यर्थी अयोग्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पटना हाई कोर्ट से हार के बाद करीब 130 याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि—
    •    फार्मासिस्ट पद की योग्यता तय करना राज्य सरकार का अधिकार है
    •    डिप्लोमा फार्मेसी अस्पतालों में दवा वितरण और रखरखाव के लिए बनाया गया कोर्स है
    •    बी फार्म और एम फार्म का पाठ्यक्रम उद्योग और रिसर्च आधारित होता है
    •    फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया भर्ती प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती

कोर्ट ने यह भी कहा कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया केवल शिक्षा और कॉलेजों के नियमन तक सीमित है, भर्ती नियम तय करना उसका काम नहीं है।

बिहार सरकार के नियम सही करार

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बिहार सरकार द्वारा बनाई गई फार्मासिस्ट संवर्ग नियमावली 2014 और संशोधित नियमावली 2024 पूरी तरह संविधानसम्मत है। सरकार का यह फैसला भी सही बताया गया कि परीक्षा 75 अंकों की होगी और 25 अंक अनुभव के लिए दिए जाएंगे।

डिप्लोमा फार्मासिस्टों को बड़ी राहत

डिप्लोमा फार्मासिस्ट संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी। संगठन ने दलील दी कि फार्मासिस्ट का पद डिप्लोमा फार्मेसी धारकों के लिए एकमात्र सरकारी अवसर है। अगर इसमें भी अन्य डिग्रीधारियों को शामिल किया गया, तो डिप्लोमा फार्मेसी का भविष्य खत्म हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए डिप्लोमा फार्मेसी को फार्मासिस्ट पद के लिए बुनियादी योग्यता माना।

अब क्या होगा आगे?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार में फार्मासिस्ट बहाली का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जल्द ही सरकारी अस्पतालों में डिप्लोमा फार्मासिस्टों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।