बिहार में खेलों का ‘सिस्टम अपग्रेड’ मिशन: मुख्य सचिव ने सुरक्षा, पीपीपी मॉडल और पारदर्शिता पर कसा शिकंजा
• खेल क्लबों को संस्थागत ढांचा, ओपन कॉल से होगी सामग्री की खरीद
• 27 एकलव्य केंद्रों की समीक्षा, हाफ मैराथन से खेल संस्कृति को बढ़ावा
पंचायत स्तर तक CCTV अनिवार्य
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी पंचायत स्तरीय खेल परिसरों और आउटडोर स्टेडियमों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। उनका कहना था कि खेल परिसरों में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही सचिव स्तर पर नियमित निरीक्षण कर मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया।
खेल क्लबों को मिलेगा संस्थागत ढांचा
बैठक में खेल क्लबों के सक्रिय संचालन को संस्थागत रूप देने का निर्णय लिया गया, ताकि उनकी नियमित समीक्षा और प्रदर्शन का आकलन हो सके। जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए हर खेल क्लब के साथ जिला खेल पदाधिकारी, राज्य सरकार के प्रशिक्षक और शारीरिक शिक्षक को टैग करने का निर्देश दिया गया।
पीपीपी मॉडल से बढ़ेगी रफ्तार
मुख्य सचिव ने खेल क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नीतिगत ढांचा बनाकर निजी क्षेत्र और स्थानीय उद्योगों को खेल विकास से जोड़ा जाए। उनका मानना है कि समावेशी और सुव्यवस्थित पीपीपी मॉडल राज्य में खेलों की तस्वीर बदल सकता है।
खेल सामग्री की खरीद में पारदर्शिता
खेल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में एकाधिकार रोकने के लिए ओपन कॉल के माध्यम से आपूर्तिकर्ताओं को एम्पैनल करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अधिकतम कीमत (कैपिंग प्राइस) तय करने की बात कही गई, ताकि किसी भी स्तर पर मूल्य शोषण न हो और सभी क्लबों को समान दर पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सके।
एकलव्य केंद्र और हाफ मैराथन
राज्य में संचालित 27 एकलव्य केंद्रों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने संतोष जताया और शेष प्रस्तावित केंद्रों को शीघ्र सक्रिय करने को कहा। विभाग ने जानकारी दी कि नवंबर और फरवरी में हाफ मैराथन आयोजित करने की योजना है, जिसकी शुरुआत इस वर्ष नवंबर से होगी।
इस समीक्षा बैठक ने साफ संकेत दिया है कि बिहार सरकार खेलों को सिर्फ आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में ठोस संरचनात्मक बदलाव पर काम कर रही है।







