‘नल का जल’ से बदली तस्वीर: बीमारियों पर ब्रेक, महिलाओं के हाथों में जल व्यवस्था की कमान
कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से उभरकर सामने आई कि स्वच्छ पेयजल की पहुंच बढ़ने से राज्य में जलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके पीछे महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी को सबसे बड़ा कारण बताया गया।
महिलाओं ने संभाली कमान, दिखाया दम
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव नित्यानंद प्रसाद ने कहा कि यह योजना सिर्फ पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत सामुदायिक पहल है। उन्होंने बताया कि महिलाओं ने न सिर्फ जलापूर्ति को सुचारू रखा, बल्कि उसके रखरखाव में भी बेहतरीन दक्षता दिखाई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन महिलाओं के योगदान को पहचान देना और उन्हें लगातार प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है, ताकि जल व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
समन्वय से और मजबूत होगी व्यवस्था
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया और माना कि पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बेहतर नतीजों के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
अनुभव साझा सत्र में अलग-अलग जिलों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव और नवाचारों को साझा किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जमीनी स्तर पर यह योजना किस तरह लोगों की जिंदगी बदल रही है।
कुल मिलाकर, ‘नल का जल’ योजना अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण बिहार में स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनती जा रही है जिसकी कमान अब महिलाओं के हाथों में मजबूती से दिखाई दे रही है।







