SIR विवाद पर तेजस्वी का बड़ा हमला, बिहार और बंगाल में फिर चुनाव की मांग; चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
Bihar News: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर कई सवाल उठाते हुए बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से SIR को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने हाल में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति को लेकर सवाल सामने आए हैं।
हालांकि, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों का अलग पक्ष रखा है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
‘बिहार और बंगाल में फिर हो चुनाव’
मीडिया से बातचीत में तेजस्वी ने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी। उन्होंने दावा किया कि दोनों राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव परिणामों पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को हराने के लिए चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं और इनके समर्थन में उन्होंने अपने बयान में कोई स्वतंत्र प्रमाण पेश नहीं किया।
1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया जिक्र
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में 1995 के सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले का भी उल्लेख किया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग की संरचना और चुनाव आयुक्तों की भूमिका पर विस्तार से विचार किया था। अदालत ने कहा था कि चुनाव आयुक्त आयोग का हिस्सा हैं और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका होनी चाहिए।
तेजस्वी ने इसी फैसले का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता का मुद्दा उठाया।
‘संवैधानिक संस्थाएं स्थायी हैं’
RJD नेता ने कहा कि राजनीतिक दल और सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लंबे समय तक बनी रहनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग की स्वायत्तता को प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को देशभर में उठाएगा।
तेजस्वी ने मौजूदा चुनावी व्यवस्था की तुलना बांग्लादेश से भी की और आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक पारदर्शिता को कमजोर किया जा रहा है।
चुनावी अधिकारियों को भी दी कार्रवाई की चेतावनी
तेजस्वी यादव ने कथित चुनावी अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों को लेकर भी सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में विपक्ष की सरकार बनती है तो चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात या अनियमितता के आरोपों की जांच कर संबंधित अधिकारियों की भूमिका तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक विवाद के बीच आयोग की ओर से यह कहा गया है कि उसके सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। वहीं विपक्षी नेता आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।







