बिहार विधान परिषद चुनाव का बिगुल बजा, 10 सीटों पर सियासी जंग शुरू, NDA मजबूत, महागठबंधन पर दबाव
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी पूरी कर ली जाएगी।
इन 10 सीटों में एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जा रहा है। यह सीट जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के त्यागपत्र के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर चुने जाने वाले सदस्य का कार्यकाल मई 2030 तक रहेगा। बाकी नौ सीटों पर नियमित द्विवार्षिक चुनाव होंगे।
इस चुनाव को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़े नेताओं की सीटें दांव पर लगी हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विधानसभा सदस्य बनने के बाद उनकी विधान परिषद सीट खाली हुई थी। इसके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और जदयू नेता श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के इस्तीफे के कारण भी सीटें रिक्त हुई हैं।
पहले इन 10 सीटों में सात सीटें एनडीए और तीन सीटें महागठबंधन के खाते में थीं। लेकिन वर्तमान विधानसभा संख्या बल के हिसाब से इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए आसानी से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है, जबकि महागठबंधन के लिए एक से ज्यादा सीट निकालना कठिन हो सकता है।
इसी वजह से सभी दलों में टिकट वितरण और राजनीतिक रणनीति को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नामांकन के साथ कौन-कौन से बड़े चेहरे मैदान में उतरते हैं और बिहार विधान परिषद की इस सियासी लड़ाई में आखिर किस गठबंधन को बढ़त मिलती है।







