बिहार पंचायत चुनाव का बिगुल बजा, जनसंख्या सूची जारी होते ही गांव-गांव में छिड़ी सियासी जंग
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक अब तक करीब 550 दावा-आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। कहीं वार्ड परिसीमन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो कहीं जनसंख्या के आंकड़ों पर लोगों ने नाराजगी जताई है। पंचायत स्तर पर संभावित उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच इसे लेकर लगातार बैठकों और रणनीतियों का दौर जारी है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिक, मतदाता और संबंधित पक्ष 18 मई तक ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई कर अंतिम सूची जारी की जाएगी।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवादों के त्वरित निपटारे के लिए आयोग ने अपीलीय व्यवस्था को भी मजबूत किया है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद से जुड़े मामलों में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है। वहीं अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को प्रथम और जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिला पदाधिकारी को द्वितीय अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा जिला परिषद सदस्य पद से जुड़े मामलों में अनुमंडल पदाधिकारी प्राधिकृत अधिकारी होंगे, जबकि जिला पदाधिकारी अंतिम अपीलीय प्राधिकार की भूमिका निभाएंगे। आयोग ने साफ किया है कि आदेश जारी होने के तीन दिनों के भीतर ही अपील करनी होगी। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
जनता की सुविधा के लिए निर्वाचन आयोग ने टोल फ्री नंबर 1800-3457-243 भी जारी किया है, जहां लोग पंचायत चुनाव से जुड़ी शिकायत, सुझाव और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पंचायत चुनाव की तैयारियों के साथ ही गांव की राजनीति में माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। कई इलाकों में संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं और जातीय समीकरणों से लेकर वार्ड पुनर्गठन तक पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव की यह सियासी हलचल और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।







