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विधायक फंड बढ़ने की मांग को लेकर एकजुट दिखा विधानसभा में पक्ष और विपक्ष

 
विधायक फंड बढ़ने की मांग को लेकर एकजुट दिखा विधानसभा में पक्ष और विपक्ष

Bihar news:  बिहार विधानसभा के चालू बजट सत्र के दौरान आज सदन की राजनीति में दुर्लभ एकजुटता की झलक दिखाई दी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक सुर में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की राशि बढ़ाने की मांग करते दिखाई पङे। विधायकों ने इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को मौजूदा चार करोड़ रुपये से बढ़ाकर आठ करोड़ रुपये करने की मांग रखी। सदन में यह मांग ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाई गई, जिस पर लगभग सभी दलों के विधायकों ने सहमति जतायी गयी थी। कार्यवाही के दौरान जैसे ही विधायक निधि का मुद्दा उठा, सदन में विकास से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा शुरू हो गई।विधायकों का कहना था कि वर्तमान में मिलने वाली राशि से क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। बढ़ती आबादी और महंगाई के बीच विकास कार्यों की लागत भी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में निधि बढ़ाना समय की मांग बन गई है।

उक्त मुद्दे पर सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के मोतिहारी विधायक प्रमोद कुमार ने सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत मिलने वाली चार करोड़ रुपये की राशि अब अपर्याप्त साबित हो रही है। उनके इस प्रस्ताव के बाद सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी विधायकों ने भी समर्थन जताया। सदन में मौजूद कई विधायकों ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए लगातार मांग बढ़ रही है। विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि सीमित राशि के कारण कई जरूरी योजनाएं अधूरी रह जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल निर्माण, शहरी क्षेत्रों में नाली और जल निकासी, स्कूलों और सामुदायिक भवनों का निर्माण जैसे काम प्राथमिकता में रहते हैं। लेकिन निधि कम होने के कारण हर मांग को पूरा करना संभव नहीं हो पाता है। विधायकों का तर्क था कि निधि दोगुनी होने से विकास की गति तेज होगी और जनता को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

सदन में उठी इस मांग पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि विधायकों की यह मांग महत्वपूर्ण है और सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि योजना एवं विकास मंत्री इस पूरे विषय की समीक्षा करेंगे। यदि समीक्षा में यह पाया गया कि निधि बढ़ाना आवश्यक है, तो सरकार इस पर उचित निर्णय ले सकती है। उनके इस बयान के बाद सदन में सकारात्मक माहौल देखा गया।उसके बाद बिहार विधानसभा अध्यक्ष डाॅ प्रेम कुमार ने सदन को बताया कि संबंधित मंत्री फिलहाल सदन में उपस्थित नहीं हैं। ऐसे में प्रक्रिया के तहत इस प्रश्न को अभी स्थगित किया जाता है। अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री की उपस्थिति में इस मुद्दे को दोबारा सदन में उठाया जाएगा, ताकि सरकार की ओर से स्पष्ट और औपचारिक जवाब मिल सके। 

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किसी तरह का टकराव नहीं दिखा। आमतौर पर बजट सत्र में आरोप-प्रत्यारोप का माहौल रहता है, लेकिन विधायक निधि के मुद्दे पर सभी दल एकमत नजर आए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह एकजुटता बताती है कि विकास से जुड़े मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सहमति बन सकती है। विधायकों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना सीधे तौर पर जनता से जुड़ी हुई है। इसी निधि से छोटे-छोटे लेकिन जरूरी विकास कार्य पूरे होते हैं, जिनका असर लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। सड़क, नाली, पानी और सामुदायिक सुविधाएं ऐसी जरूरतें हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए निधि बढ़ाने से जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने में आसानी होगी।

अब इस मुद्दे पर सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार विधायक निधि को दोगुना करने का फैसला लेती है, तो इसे बजट सत्र की बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। वहीं, यदि समीक्षा के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था सुझाई जाती है, तो उस पर भी सदन में चर्चा तय मानी जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष के बयान के अनुसार, संबंधित मंत्री की मौजूदगी में इस मुद्दे को फिर से सदन में उठाया जाएगा। तब सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जाएगा कि निधि बढ़ाने को लेकर क्या नीति अपनाई जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि विधायकों की एकजुट मांग ने सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र में विधायक निधि दोगुनी करने की मांग ने यह दिखाया कि जब सवाल विकास का हो, तो राजनीतिक मतभेद पीछे छूट सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस एकजुट आवाज को किस तरह से निर्णय में बदलती है।