विश्वविद्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा!- सांसद सुधाकर सिंह के गंभीर आरोप, नियम तोड़कर नियुक्तियां, परिवारवाद और करोड़ों की गड़बड़ी
नियमों को दरकिनार कर ‘फेवरेट’ नियुक्ति का आरोप
सांसद ने दावा किया कि सात पदों के लिए निकले विज्ञापन के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर एक अतिरिक्त व्यक्ति को प्रोफेसर पद पर नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के युवाओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकारी आदेशों की अवहेलना
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा के नियमों के मुताबिक विश्वविद्यालयों में सीधी नियुक्ति नहीं हो सकती, इसके लिए Bihar पब्लिक सर्विस कमिशन जैसी संस्थाओं के जरिए प्रक्रिया होनी चाहिए। बावजूद इसके, दो-दो बार रोक के आदेश के बाद भी नियुक्तियां जारी हैं।
परिवारवाद का आरोप
सुधाकर सिंह ने कुलपति पर अपने परिजनों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुलपति की बेटी को कथित तौर पर अवैध तरीके से नियुक्त किया गया और उनका वेतन कई गुना बढ़ा दिया गया। साथ ही बेटे की कंपनी को भी ठेका देने की बात कही गई।
शोध और पेटेंट के नाम पर ‘खेल’?
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के लाखों रुपये खर्च कर कम समय में कई पेटेंट अपने नाम कराए गए, जबकि पूर्व में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं था। साथ ही सरकारी फंड को एनजीओ में ट्रांसफर करने का भी आरोप लगाया गया।
विदेशी उपकरण खरीद में गड़बड़ी
उन्होंने जर्मनी से मशीन खरीद में भी अनियमितता का आरोप लगाया—बिना ट्रेनिंग के ही भुगतान कर दिया गया और उपकरण अब बेकार पड़े हैं।
कुलाधिपति से कार्रवाई की मांग
सांसद ने राज्यपाल (कुलाधिपति) से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य की कृषि और शोध व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।







