बिहार की महिलाओं की आवाज़ बुलंद: ‘संयुक्त महिला अभियान’ की बड़ी बैठक में 19 जिलों की 6,000 महिलाओं की आवाज़ गूंजी
Bihar news: राजधानी पटना के जन शक्ति भवन (बीरचंद पटेल रोड) में शुक्रवार को “संयुक्त महिला अभियान – बोल उठी महिलाएँ” के बैनर तले बिहार की महिलाओं के मुद्दों पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में राज्यभर से आए विभिन्न महिला समूहों, स्वतंत्र कार्यकर्ताओं और महागठबंधन के घटक दलों के महिला संगठनों ने हिस्सा लिया।
यह अभियान 18 सितंबर को पटना में हुई पहली बैठक से शुरू हुआ था, जिसमें बिहार के अलग-अलग जिलों की महिला प्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य की ग्रामीण, शहरी और वंचित तबकों की महिलाओं, विशेषकर हाशिए पर रह रही महिलाओं को एक साझा मंच देना है, ताकि वे अपने जीवन की चुनौतियों और संघर्षों को निर्भीकता से सामने रख सकें।

19 जिलों में महिला संवाद, 6,000 महिलाओं की भागीदारी
अभियान के तहत टीम ने पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीवान, सारण, भोजपुर, पटना, गया, नालंदा, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, नवादा, शेखपुरा, बेगूसराय, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिलों में जाकर 150 से अधिक मोहल्ला मीटिंग्स कीं। इन बैठकों में करीब 6,000 महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,500 से अधिक महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी।
500 से ज़्यादा महिलाओं के वीडियो वक्तव्य रिकॉर्ड किए गए, जिनमें से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं और देश-विदेश तक पहुंच चुके हैं।
30 सूत्रीय मांग पत्र हुआ जारी
इन महिला संवादों के आधार पर तैयार 30 सूत्रीय मांग पत्र को आज मंच से सार्वजनिक किया गया। इसे ऐपवा से मंज शर्मा, ऐडवा से सरिता पांडेय, बिहार महिला समाज से निवेदिता झा, आरजेडी महिला से मुकुंद सिंह, कांग्रेस से डॉ. मधु बाला, बिहार वुमेंस नेटवर्क से नीलू, और महिला एक्टिविस्ट्स विजयश्री डांगरे व शबनम हाशमी (दिल्ली) ने जारी किया।
मांग पत्र को छह मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
1. आर्थिक एवं वित्तीय अधिकार
2. रोजगार और श्रम अधिकार
3. शिक्षा और कौशल विकास
4. सुरक्षा, न्याय और कानून
5. भूमि, आवास और बुनियादी सुविधाएँ
6. राजनीतिक भागीदारी और समावेशन
इन विषयों को प्रतीकात्मक रूप से रंग-बिरंगी छतरियों पर चित्रित किया गया, जिनकी पेंटिंग इप्टा के कलाकार दिनेश ने तैयार की।
महिलाओं के संघर्ष पर बनी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन
बैठक के दौरान “बिहार की महिलाओं का अनदेखा संघर्ष” शीर्षक से एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री सैकड़ों महिलाओं की सच्ची कहानियों और अनुभवों पर आधारित है। वीडियो की शूटिंग प्रीति प्रभा और शबनम हाशमी ने की, फोटोग्राफी अमित यादव और फैज़ान खान की है। वृत्तचित्र में गौहर रज़ा की आवाज़ में नैरेशन है, एडिटिंग अरमा अंसारी ने की, और गीत ब्यूटी रंजना ने गाया है।
ग्रामीण महिलाओं के ऋण समाधान और रोजगार पर गहन विमर्श
कार्यक्रम में “ग्रामीण महिलाओं के लिए ऋण समाधान और रोजगार के रास्ते” विषय पर एक पैनल डिस्कशन भी हुआ।
इसमें प्रमुख वक्ताओं के रूप में शामिल हुए :
• डॉ. प्रभाकर परकला (अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक विश्लेषक, तेलंगाना)
उन्होंने कहा, “देश में 50% से अधिक पूंजी कुछ उद्योगपतियों के पास केंद्रित है, जबकि माइक्रोफाइनेंस के कर्ज़ ने हजारों महिलाओं को आत्महत्या की कगार पर पहुंचा दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से सरकारें अब मुंह मोड़ रही हैं।”
• गगन सेठी (संगठनात्मक विकास विशेषज्ञ, गुजरात)
उन्होंने ज़ोर दिया कि “गांव की महिलाओं को संगठित होकर अपनी बात रखनी होगी। जब तक आवाज़ नहीं उठेगी, तब तक बदलाव असंभव है। बिहार के हर स्कूल में कम से कम 50% लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करनी होगी।”
• कुमारेश सिंह (हाई कोर्ट वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता, पटना)
उन्होंने बताया कि “आंध्र प्रदेश में एक विशेष कानून है, जिसके तहत माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा कर्ज़ वसूली में धमकी या हिंसा करने पर तीन साल तक की सज़ा का प्रावधान है। बिहार को भी ऐसी कानूनी व्यवस्था अपनानी चाहिए।पैनल के मॉडरेटर अरशद अजमल (सीईओ, Relief Livelihood Care India Foundation) थे, जिन्होंने ब्याज-मुक्त वित्त के मॉडल और ग्रामीण सहकारी समितियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
चर्चा के तीन मुख्य बिंदु रहे
1. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के ऋण जाल से महिलाओं को मुक्ति दिलाने के उपाय
2. इस समस्या से निपटने के लिए कानूनी रास्ते
3. ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार सृजन के ठोस उपाय
पैनल के निष्कर्षों पर आधारित एक नीतिगत दस्तावेज़ तैयार किया जाएगा, जिसे सभी राजनीतिक दलों और नीति निर्माताओं को सौंपा जाएगा।
उपस्थित अतिथि
बैठक में रूपेश, कपिलेश्वर जी, विनोद जी, तनवीर अख्तर, प्रेम, चंद्रभूषण शर्मा, टीपू सुल्तान, मुस्कान, कबीर और प्रियंका सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
अभियान की दिशा
संयुक्त महिला अभियान ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में यह पहल राज्य के सभी जिलों में जारी रहेगी। इसका उद्देश्य केवल आवाज़ उठाना नहीं, बल्कि नीति निर्माण के केंद्र तक ग्रामीण और वंचित महिलाओं की आवाज़ पहुंचाना है।







