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बिहार में फिर गूंजेगी चीनी मिलों की सीटी! रैयाम और सकरी में सहकारी मॉडल पर शुरू हुई नई पहल, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

 
बिहार में फिर गूंजेगी चीनी मिलों की सीटी! रैयाम और सकरी में सहकारी मॉडल पर शुरू हुई नई पहल, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
Newshaat Desk: बिहार में गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने मधुबनी और दरभंगा क्षेत्र के किसानों को नई सौगात देते हुए रैयाम और सकरी में सहकारी क्षेत्र के तहत नई चीनी मिलों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए दोनों क्षेत्रों में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन और निबंधन की कार्रवाई तेज कर दी गई है।

सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने बुधवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी कर समितियों का पंजीकरण कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार की योजना के अनुसार प्रस्तावित चीनी मिलों के सदस्य स्थानीय गन्ना उत्पादक किसान होंगे। इसी उद्देश्य से रैयाम प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति और सकरी प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के गठन की प्रक्रिया बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 के तहत शुरू कर दी गई है।

गन्ना उद्योग विभाग द्वारा दोनों चीनी मिलों के लिए विस्तृत क्षेत्र भी निर्धारित कर दिया गया है। रैयाम चीनी मिल के लिए मधुबनी और दरभंगा के कुल 1018 गांवों को, जबकि सकरी चीनी मिल के लिए दोनों जिलों के 1383 गांवों को आरक्षित क्षेत्र में शामिल किया गया है।

किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने के लिए दो सदस्यीय ऑर्गेनाइजर कमेटी का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान चला रही है। किसानों को गन्ना खेती के फायदे और सहकारी मॉडल से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जा रही है।

सदस्यता के लिए सरकार ने स्पष्ट मानक तय किए हैं। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए न्यूनतम 100 डिसमिल भूमि पर गन्ना उत्पादन या उत्पादन की इच्छा जरूरी होगी, जबकि अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल रखी गई है। सदस्य बनने के लिए कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। प्रवेश शुल्क 500 रुपये और एक शेयर का मूल्य 1000 रुपये निर्धारित किया गया है।

सहकारिता विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है। इसके माध्यम से इच्छुक किसान घर बैठे सहकारी समिति की सदस्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे। विभाग ने संकेत दिया है कि यह पोर्टल जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि सहकारी क्षेत्र में चीनी मिलों की स्थापना से न सिर्फ गन्ना किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। लंबे समय से बंद पड़े चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।