सकरी-रैयाम में फिर बजेगी चीनी मिल की सीटी! ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के तहत बड़ा MoU, सहकारिता मॉडल से बदलेगा गन्ना किसानों का भविष्य
सहकारिता विभाग, बिहार सरकार और National Federation of Co-operative Sugar Factories Ltd. (NFCSF), नई दिल्ली के बीच MoU पर हस्ताक्षर किए गए। विभाग की ओर से संयुक्त सचिव मो० अब्दुल रब खाँ और NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने समझौते पर दस्तखत किए।
सकरी और रैयाम में नई शुरुआत
मधुबनी जिले के सकरी और दरभंगा जिले के रैयाम में बंद पड़ी चीनी मिलों के स्थान पर आधुनिक सहकारी चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी। पहले चरण में NFCSF संभाव्यता (Viability) रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) बनाकर कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
दोनों स्थलों पर उपलब्ध जमीन-सकरी में 30.848 एकड़ और रैयाम में 68.176 एकड़ को विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है।
सिर्फ चीनी नहीं, पावर और इथेनॉल भी
प्रस्तावित गन्ना कॉम्प्लेक्स में केवल चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि पावर जेनरेशन, इथेनॉल और Compressed Bio Gas (CBG) उत्पादन की भी योजना है। इससे परियोजना आर्थिक रूप से मजबूत बनेगी और किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि सहकारी मॉडल के तहत गन्ना उत्पादक किसानों की समितियां बनाई जाएंगी। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार और गन्ने का उचित मूल्य मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई पूंजी का प्रवाह होगा।
अनुभवी संस्था के साथ साझेदारी
NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने कहा कि देश के कई राज्यों में चीनी मिलों की स्थापना और पुनरुद्धार का व्यापक अनुभव उनकी संस्था को है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सकरी और रैयाम का 7-8 दिनों तक क्षेत्रीय अध्ययन करेगी, ताकि परियोजना को जल्द गति दी जा सके।
कार्यक्रम में ईखायुक्त अनिल कुमार झा, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उद्योग और कृषि को साथ लेकर आगे बढ़ेगा बिहार
बिहार में कभी चीनी उद्योग समृद्धि का प्रतीक था। अब सहकारिता मॉडल के जरिए उसे फिर से खड़ा करने की कोशिश हो रही है। यदि योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो सकरी और रैयाम की चीनी मिलें सिर्फ उद्योग नहीं, बल्कि गन्ना किसानों की नई उम्मीद बन सकती हैं।







