निर्माणाधीन पुल भरभराकर गिरा: तीन इंजीनियर सस्पेंड, ठेकेदार पर भी कार्रवाई की तलवार
गनीमत यह रही कि हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। यदि पुल चालू होने के बाद गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की। प्रारंभिक पड़ताल में तकनीकी मानकों की अनदेखी, मॉनिटरिंग में कमी और संभावित अनियमितताओं की आशंका सामने आई।
इसी आधार पर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी।
ठेकेदार एजेंसी पर भी शिकंजा
सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य कर रही संवेदक एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर भी विचार चल रहा है। पुल निर्माण में सरकारी धन खर्च हुआ है, ऐसे में वित्तीय जवाबदेही भी तय की जाएगी।
ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल उनके लिए जीवनरेखा साबित होता। अब इसके गिरने से न केवल संपर्क मार्ग बाधित हुआ है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ा है। ग्रामीणों ने न्यायिक जांच और तय समय सीमा में मजबूत पुल के पुनर्निर्माण की मांग की है।
हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं के बाद सरकार पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है। गोपालगंज की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार पर अब सीधी और कठोर कार्रवाई होगी।







